आठ साल का मासूम सीरियल किलरः कत्ल के बाद हंसता था

FIR. जिस उम्र में हर बच्चा पेंसिल और खिलौनों के लिए लड़ता है वहीं अमरदीप इस छोटी सी उम्र में कातिल बन गया. कातिल भी ऐसा कि अपने शिकार को पत्थर से वार कर-कर के मार देता. कत्ल का जुनून इस कदर उसके सिर पर चढ़ा कि एक के बाद एक तीन कत्ल कर दिए.

आठ साल का मासूम सीरियल किलरः कत्ल के बाद हंसता था
फाइल फोटो अमरदीप सदा

कत्ल करने का जुनून

मुझे जख्म और शरीर से निकलता हुआ खून देखकर बहुत मजा आता है. ये कहना है आठ साल के बच्चे का, जो कि मासूम नहीं एक कातिल है. एक ऐसा कातिल जिसने एक नहीं तीन कत्ल किए. तीनों कत्ल एक ही तरीके से अंजाम दिए गए. पत्थर से मार-मार कर उनका चेहरा बिगाड़ दिया. इस आठ साल के खूनी ने अपना पहला शिकार चुना अपनी ही दुधमुही बहिन को. जिसका पत्थर से मार-मार कर सिर कुचल दिया. इस खून के बाद उसका हौसला और बढ़ा और इस कत्ल के छह महीने बाद ही अपने चाचा के आठ महीने के बेटे को मौत के घाट उतार दिया. कत्ल का सिलसिला यहीं नहीं थमा. इस आठ साल के अमरदीप सदा ने तीसरा कत्ल गांव की ही एक बच्ची का किया जिसके बाद वो पुलिस की गिरफ्त में आया.

 नाम अमरदीप सदा, उम्र सात साल, कापी और पेंसिल पकडने की उम्र में इस बच्चे के हाथ में पुलिस की हथकडियां थी. ये एक ऐसा कातिल था जिसे न सजा का डर था और न ही पुलिस के बारे में कोई जानकारी थी. इस आठ साल के बच्चे के नाम विश्व के सबसे छोटे सीरियल किलर का तमगा था. अमरदीप सदा का जन्म बिहार के बेगुसराय के मुसहरी गांव में साल 1998 में हुआ. अमरदीप सदा का जन्म एक बेहद की गरीब परिवार में हुआ, उसके पिता मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण किया करते थे.  

कत्ल करने की शुरुआत

अमरदीप ने सबसे पहला कत्ल अपनी छह महीने की बहिन का किया. उसने अपनी ही बहिन के सिर पर पत्थर से वार कर-कर के मार डाला.  उसके माता-पिता को ये पता चल गया था कि अमरदीप ने ही अपनी बहिन को मार दिया है मगर अपने ही बेटे को पुलिस के हवाले करने की जगह वो इस मामले को दबा गए. मगर इसका नतीजा भी अमरदीप के परिवार को भुगतना पड़ा. पहली हत्या के छह महीने बाद ही अमरदीप ने एक और हत्या को अंजाम दिया. इस बार उसका शिकार अपने ही चाचा का आठ महीने का बेटा था. जिसे अमरदीप ने अपनी बहिन की तरह पत्थर से वार कर-कर के मार डाला. और इस बार उसके कातिल होने की चुगली उसके हाथों में लगा खून कर रहा था. ताज्जुब की बात तो ये है कि इस बार भी इस बेरहम कातिल को परिवार वालों के अपनी बच्चा समझ कर माफ कर दिया और पूरे मामले को पारिवारिक मसला मानते हुए दबा लिया. मगर अमरदीप को इस मौत के खेल में मजा आने लगा था. छह महीने के भीतर उसने दो कत्ल कर दिए थे.

तीसरा कत्ल और पुलिस का शिकंजा

इन दोनों हत्यओं का तीन महीने भी नहीं गुजरे थे कि अमरदीप ने गांव में ही रहने वाली एक साल की बच्ची खुशबू को अपना निशाना बनाया. खुशबू अपनी मां के साथ गांव के प्राइमरी स्कूल के आंगन में खेल रही थी. खेलते-खेलते खुशबू वहीं सो गई. खुशबू की मां बेटी को वहीं सोता छोड़कर किसी काम के लिए पास में ही चली गई. जाते समय उसकी नजर अमरदीप पर पड़ी. जो वहीं पास में बैठा था. मगर गांव के ही बच्चे को देखकर उसे किसी खतरे का आभास नहीं हुआ और वो अपनी बेटी को वहां छोड़कर चली गई. थोड़ी देर बाद जब वो अपना काम करके लोटी तो खुशबू वहां से गायब थी. खूशबू की मां ने उसे सब जगह ढूंढा मगर खुशबू का कहीं पता नहीं चला. थक कर उन्होने थाने में खुशबू के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने खुशबू को तलाशना शुरु किया मगर उसकी मां बार-बार अमरदीप से पूछताछ करने की बात पुलिस से कहती रही. मगर पुलिस अमरदीप की उम्र देखकर इस बात को नजरअंदाज करती रही कि अमरदीप को उस बच्ची के बारे में क्या पता होगा. बार-बार खुशबू की मां के कहने पर पुलिस अमरदीप और उसके माता-पिता को थाने ले आई. अब पुलिस ने अमरदीप से सवाल करना शुरु किया कि क्या तुम जानते हो खुशबू कहां है. इस पर अमरदीप हंसने लगा और कुछ न बोला. पुलिस ने अपना सवाल कई बार दोहराया पर अमरदीप हंसता ही रहा. काफी देर बाद अमरदीप ने कहा कि अगर आप मुझे बिस्कुट दो तो मैं बताऊंगा. बिस्कुट खाने के बाद उसने कहा कि मैंने उसे खपरैल से मारकर सुला दिया है. ये सुनते ही पुलिसवालों के होश उड़ गए. काफी देर की पूछताछ के बाद अमरदीप पुलिस को उस खेत में ले गया जहां उसने खुशबू की लाश को ठिकाने लगाया था. अब पुलिस स्कूल के पास के ही खेत में कुछ सूखी झाडियों के सामने खड़ी थी. उन झाडियों को हटाने पर पुलिस को वहां एक गड्ढा दिखा जिसमें खुशबू की लाश थी. खुशबू की लाश को बाहर निकाला गया तो पाया कि उसके सिर पर किसी भारी चीज से इतने वार किये हुए थे कि चेहरे को पहचान पाना मुश्किल था. पुलिस को अपना आगे का एक्शन समझपाना मुश्किल हो रहा था. क्योंकि उनके सामने एक आठ साल का बच्चा था जिसकी निशानदेही पर खुशबू की लाश पुलिस ने बरामद कर ली थी. कत्ल हुआ था और कातिल एक आठ साल का बच्चा था. अब पुलिस के सामने बड़ा सवाल था कि अमरदीप ने ये कत्ल क्यों किए. पुलिस के पूछने पर अमरदीप ने बताया कि उसे जख्म और उनसे निकलते खून को देखना अच्छा लगता है. शरीर से बहते हुए खून को देखकर उसे बहुत अच्छा लगता है इसलिए वो कत्ल कर देता है. इस पूरे मामले में पुलिस ने अमरदीप को साइकेट्रिस्ट के पास भैजा जहां उन्होंने ये बताया कि अमरदीप को पता ही नहीं है कि उसने जो किया है वो गलत है, अपराध है. उन्होंने यह भी कहा कि अमरदीप को एक दिमागी बीमारी है जिसकी वजह से उसे किसी को तकलीफ में देखना अच्छा लगता है. उसके मारने से किसी के शरीर से खून निकलता देखना अमरदीप को अच्छा लगता है.

कोर्ट से सामान्य जीवन तक

इसके बाद इस पूरे मामले को कोर्ट में पहुंचाया गया, जहां ये माना गया कि अमरदीप को सही गलत का अंदाजा ही नहीं है. मगर उसने तीन कत्ल किए है लिहाजा उसे ऐसे छोड़ा भी नहीं जा सकता. अमरदीप को बाल सुधार गृह रखने का फैसला लिया गया. मगर उसमें भी ये मसला था कि तीन साल से ज्यादा बाल सुधार गृह में नहीं रखा जा सकता है और अमरदीप की उम्र इतनी कम है कि तीन साल बाद भी वह नाबालिग ही है. इसलिए कोर्ट ने ये तय किया कि 18 साल का होने तक अमरदीप सदा को बाल सुधार गृह में ही रखा जाएगा. साथ ही कोर्ट ने ये भी हिदायत दी कि अमरदीप को बाल सुधार गृह में सभी बच्चों के साथ नहीं बल्कि अलग ही रखा जाएगा ताकि वो किसी और बच्चे को नुकसान न पहुंचा सके. अपने नाम विश्व के सबसे छोटे सीरियल किलर का खिताब हासिल किए अमरदीप सदा बालिग होने तक बाल सुधार गृह में ही रहा. यहां इसे बाकी सब बच्चों से अलग रखा गया. बालिग होने के बाद अमरदीप को पुलिस ने साल 2015 में रिहा कर दिया. अब वो अपनी अलग पहचान के साथ समाज में हमारे ही बीच जिंदगी गुजार रहा है. हम नहीं जानते कि अमरदीप के अंदर छुपा कातिल मर चुका है या नहीं.