जिस आतंकी वलीउल्लाह को फांसी की सजा मिली, उसका मुकदमा वापस लेने वाले थे अखिलेश यादव, कोर्ट ने कहा था-पद्म विभूषण दोगे क्या?

वाराणसी सीरियल बम ब्‍लास्‍ट के मामले में सोमवार को गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने आतंकी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुना दी. सात मार्च 2006 को वाराणसी में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. 18 लोगों की मौत और करीब डेढ़ सौ से अधिक लोग घायल हुए थे. इससे पहले 4 जून को गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में सुनवाई हुई थी. जिसके बाद कोर्ट ने अब इस मामले में अपना फैसल सुनाया.

जिस आतंकी वलीउल्लाह को फांसी की सजा मिली, उसका मुकदमा वापस लेने वाले थे अखिलेश यादव, कोर्ट ने कहा था-पद्म विभूषण दोगे क्या?
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समाजवादी पार्टी ने की थी बचाने की कोशिश
विस्फोट के बाद पुलिस के गिरफ्त में आतंकी वलीउल्लाह के आने पर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी सरकार ने बचाने की कोशिश की थी. उस समय की समाजवादी सरकार ने गुपचुप तरीके से मुकदमा वापसी की तैयारी शुरू कर दी थी. असल में अखिलेश यादव ने 2012 में सत्ता में आने से पहले अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि सरकार बनने पर वह देखेंगे कि क्या आतंकी गतिविधियों में मुस्लिम युवकों को फंसाया तो नहीं गया है. अखिलेश यादव ने मुस्लिमों के ऊपर से केस वापस लेने का वादा किया था. विशेष सचिव राजेंद्र कुमार की ओर से इस बारे में एक पत्र जिला प्रशासन को भेजा गया था, जिसमें 14 बिंदुओं पर केस वापसी के बारे में राय मांगी थी.  वाराणसी विस्फोट मामले में आतंकी वलीउल्लाह के साथ कुछ अन्य आतंकवादियों के खिलाफ मामले वापस लेने के अखिलेश यादव के फैसले को 23 नवंबर, 2012 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने तक अखिलेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि जब कोर्ट में मुकदमा चल रहा है तो आप इसे क्यों वापस लेना चाहते हैं? हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि आज आप आतंकियों को रिहा कर रहे हैं, कल उन्हें पद्म भूषण भी दे देंगे.

2006 में हुए थे सीरियल बम ब्‍लास्‍ट

वाराणसी के संकट मोचन मंदिर और कैंट रेलवे स्टेशन पर 2006 में सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे. इन धमाकों में 18 लोगों की मौत  हुई थी और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. उसी शाम को दशाश्वमेध घाट पर भी विस्फोटक मिले थे. सीरियल ब्लास्ट के इस केस में गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने आतंकी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाई है. यह फैसला धमाकों के पूरे 16 साल बाद आया है. वाराणसी पुलिस ने इस मामले में 5 अप्रैल 2006 को इस इलाहाबाद के फूलपुर गांव में रहने वाले आतंकी वलीउल्लाह को लखनऊ के गोसाईंगंज इलाके से गिरफ्तार किया था. इस आतंकी घटना में दोषी ठहराए गए वलीउल्लाह पर संकट मोचन मंदिर और वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन पर विस्फोट की साजिश रचने, आतंकी घटना को अंजाम तक पहुंचाकर आतंकवाद फैलाने का आरोप 4 जून को सिद्ध हो चुका था.

वाराणसी से गाजियाबाद ट्रांसफर हुआ था केस

बम धमाकों को अंजाम देने वाले वलीउल्लाह का मुकदमा लड़ने से वाराणसी के वकीलों ने इनकार कर दिया था. जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह केस गाजियाबाद जिला जज की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था. तभी से केस की सुनवाई गाजियाबाद स्थित जिला जज की कोर्ट में चल रही थी. फैंसले से पहले 4 जून को गाजियाबाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने वलीउल्लाह को दोषी ठहराया था. जिला एवं सत्र न्यायाधीश जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में 23 मई को वाराणसी बम कांड में सुनवाई हुई थी. सुनवाई शुरू होने से पहले आरोपी वलीउल्लाह को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया था. जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसले के लिए 4 जून की तारीख नियत की गई थी. जिसके बाद अब कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया.

 

यहां हुए थे बम ब्‍लास्‍ट

दरअसल आतंकियों द्वारा 7 मार्च 2006 को वाराणसी के संकटमोचन मंदिर और रेलवे कैंट पर बम धमाके किये गए थे. धमाकों के बाद दहशत के चलते अफरातफरी मच गई थी. इसके साथ ही दशाश्वमेध घाट पर भी कुकर बम मिला था. धमाकों में संकट मोचन मंदिर में 7 और कैंट स्टेशन पर 11 लोगों की मौत हुई थी. साथ ही डेढ़ सौ से अधिक लोग इस आतंकी घटना में घायल हुए थे. इस मामले में आतंकी वलीउल्‍लाह को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ कोर्ट में इस साजिश को रचने और अंजाम देने का मामला सिद्ध हुआ था.

 

संकटमोचन मंदिर में होती थी शादियां

वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में शादियां हुआ करती थीं. लेकिन ब्लास्ट के बाद से ही मंदिर में अब शादियां नहीं होती हैं. सात मार्च 2006 को मंगलवार का दिन था. उस समय भी संकटमोचन मंदिर में शादियां हो रही थी. यही नहीं वहां पर यज्ञ व हवन पूजन चल रहा था. बम ब्लास्ट के बाद से मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा कारणों से यहां होने वाली शादियों पर रोक लगा दी. जिस समय ब्लास्ट हुआ था उस समय फोटोग्राफर हरीश बिजलानी शादी की फोटो खींच रहे थे. ब्लास्ट में उनकी मौत हो गई थी. ब्लास्ट के पहले तक यहां शादी विवाह से जुड़े कई आयोजन होते थे. आर्थिक रूप से कमजोर लोग इसी मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर शादियां करते थे. जब से इस मंदिर में शादियों पर रोक लगी है, तब से लोग आस पास के दूसरे मंदिरों में जाकर शादी समारोह करते हैं.