बिहार में बीजेपी नंबर वनः यूपी में बाबा को हराने चले थे सहनी, खुद की पार्टी का नामो-निशां मिटा

एक दिन पहले ही हमने बताया था कि वीआईपी के तीनों विधायक यानी स्वर्णा सिंह, मिश्रीलाल यादव और राजू कुमार सिंह अपने नेता मुकेश सहनी का साथ छोड़ सकते हैं। इसलिए कि इन तीनों ने ही भाजपा से जुड़े होने के बावजूद वीआईपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था।

बिहार में बीजेपी नंबर वनः यूपी में बाबा को हराने चले थे सहनी, खुद की पार्टी का नामो-निशां मिटा
वीआईपी के तीनों विधायकों ने ली भाजपा की सदस्यता.

-गंगेश मिश्र-

पटना। चौबे गए छब्बे बनने, दूबे बनकर आए। बिहार में ऐसा हुआ है विकासशील इंसान पार्टी यानी वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी के साथ। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा को सबक निकले सहनी की नैया घर में ही डूब गई। उनके तीनों विधायक बुधवार को सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका निभा रही भाजपा में शामिल हो गए। विधानसभा अध्यक्ष ने वीआईपी के तीनों विधायकों के भाजपा विधायक दल में विलय को मंजूरी भी दे दी। इससे 2020 के विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहने वाली भाजपा अब बिहार की नंबर वन पार्टी बन गई है। भाजपा विधायकों की संख्या 74 से बढ़कर 77 हो गई है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अब राज्य में दूसरे स्थान पर चली गई है। उसके पास 75 विधायक हैं।

एक दिन पहले ही हमने बताया था कि वीआईपी के तीनों विधायक यानी स्वर्णा सिंह, मिश्रीलाल यादव और राजू कुमार सिंह अपने नेता मुकेश सहनी का साथ छोड़ सकते हैं। इसलिए कि इन तीनों ने ही भाजपा से जुड़े होने के बावजूद वीआईपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा था। बता दें कि तब 11 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली वीआईपी को प्रत्याशी नहीं मिल रहे थे।

अब मंत्री भी नहीं रहेंगे सहनी

अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी के घर सन्नाटा है। इससे जाहिर हो रहा है कि भाजपा ने उन्हें कितनी गहरी चोट दी है। वैसे यह जख्म आने वाले दिनों में और गहराएगा। पहले तो तमाम नरमी के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन्हें मंत्री बनाए नहीं रखेंगे। बहुत संभव है कि गुरुवार तक वह खुद इस्तीफा दे दें। फिर विधान परिषद सदस्य का उनका कार्यकाल भी 21 जुलाई तक ही है। वह विधानसभा का चुनाव हार गए थे। विधान परिषद में अब दोबारा एमएलसी बनना उनके लिए कठिन हो गया है। इसलिए कि सत्ताधारी दलों के अलावा मुख्य विपक्षी दल राजद के नेता भी उनके अस्थिर स्वभाव से वाकिफ हैं। और, विधानसभा का अगला चुनाव 2026 में होगा।

नीतीश सरकार भी हो गई सुरक्षित

243 सदस्यी बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। इस विलय से सत्तारूढ़ एनडीए के कुल 127 विधायक हैं। बोचहां में वीआईपी विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के कारण उपचुनाव चल रहा है। तिकोने मुकाबले में यहां से भाजपा की बेबी रानी की जीत तय लग रही है। उनकी जीत से भाजपा और एनडीए के पक्ष में एक विधायक की बढ़ोतरी और हो जाएगी। उससे पहले भी अब अगर चार विधायकों के साथ हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा यानी हम पार्टी और एक निर्दलीय विधायक भी समर्थन वापस ले ले, तब भी नीतीश सरकार सुरक्षित रहेगी। इस तरह हम के नेता जीतन राम मांझी के हाथ से सरकार को घुड़की देने का अवसर भी चला गया।

विधानसभा में दलगत स्थिति

कुल सदस्य- 243

इस समय- 242

एनडीए के कुल विधायक – 127

  • भाजपा- 77
  • जदयू- 45
  • हम- 4
  • निर्दलीय- 1

महागठबंधन के कुल विधायक- 115

  • राजद- 75
  • कांग्रेस- 19
  • वाम मोर्चा- 16
  • एआईएमआईएम- 5

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)