सरकारी वकीलों में मचा हाहाकार, इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ के करीब 900 वकील बर्खास्‍त

यूपी में कानून व्‍यवस्‍था को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है. जिससे सरकारी वकीलों में हड़कंप मच गया है. सरकारी वकीलों की बर्खास्‍तगी के आदेश के बाद मानो कानून व्‍यवस्‍था में भूचाल सा आ गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच में 900 से ज्यादा सरकारी वकीलों को हटा दिया गया है. जिसके बाद माना जा रहा है, अब नए वकीलों को मौका मिलेगा.

सरकारी वकीलों में मचा हाहाकार, इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ के करीब 900 वकील बर्खास्‍त
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अपर महाधिवक्‍ता से लेकर ब्रीफ होल्‍डर तक बर्खास्‍त

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के कानून विभाग में सरकारी वकीलों की बड़ी संख्‍या में बर्खास्तगी हुई है. जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट और लखनऊ खंडपीठ के करीब 900 सरकारी वकील बर्खास्त किए गए हैं. इससे संबंधित आदेश भी जारी हो गए हैं. इस फैसले से इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर लखनऊ खंडपीठ तक हाहाकार मच गया है. बताया जा रहा है कि बर्खास्त हुए सरकारी वकीलों में अपर महाधिवक्ता से लेकर ब्रीफ होल्डर तक शामिल हैं. वहीं माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर हुई सरकारी वकीलों की बर्खास्तगी के बाद अब नये वकीलों को मौका मिलेगा.

 

पिछली सरकारों में हुई थी नियुक्तियां

रिपोर्ट के अनुसार बर्खास्‍त वकीलों की नियुक्तियां सपा-बसपा सरकारों में की गई थीं. जिसमें भ्रष्टाचार होने की संभावना जताई जा रही थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास उत्तर प्रदेश में इस वक्त कानून मंत्रालय का भी प्रभार है. लिहाजा समीक्षा बैठक के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया. न्याय विभाग की तरफ से इन सभी 900 अधिवक्ताओं को बर्खास्त कर दिया गया है. आपको बता दें कि हर पांच साल पर सरकारी वकीलों को लेकर आदेश जारी होते हैं. कुछ सरकारी वकील हटाए जाते हैं, जिसके बाद नए लोगों को मौका मिलता है.

 

नए 500 अधिवक्ताओं की तैनाती

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी के 75 जिलों के साथ लखनऊ खंडपीठ और इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 1850 शासकीय अधिवक्ता के तौर पर तैनात थे, जिसमें से 900 को हटाया गया है. जबकि उनके स्थान पर परफॉर्मेंस को देखते हुए 500 नए अधिवक्ताओं की भी तैनाती कर दी गई है. वहीं माना जा रहा है कि अब सरकार के मुकदमे जो न्यायालय में चलते थे, उसकी प्रभावी ढंग से पैरवी हो पाएगी. पहले यही बात समीक्षा बैठक में कही गई थी कि योग्य अधिवक्ताओं की नियुक्ति नहीं हुई है. जिसकी वजह से सरकार के मुकदमे प्रभावित हो रहे हैं. इसके साथ ही अपराध और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है. अब इस फैसले के बाद सरकार के मुकदमों की प्रभावी पैरवी भी होगी और पुराने मुकदमों को निपटारा भी होगा. 

 

सरकारी वकीलों की नियुक्ति प्रोसेस 

जानकारी के अनुसार सरकारी वकीलों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है. केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों में से कोई भी सरकार वकीलों की नियुक्ति कर सकती है. हालांकि, नियुक्ति कौन सी सरकार करेगी, वो इस बात पर निर्भर होगा कि आप किस कोर्ट में वकालत करना चाहते हैं. हाई कोर्ट में सरकारी वकीलों की नियुक्ति, उस राज्य की सरकार और केंद्र सरकार द्वारा, उच्च न्यायालय से विचार और परामर्श करने के बाद किया जाता है. वहीं, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकीलों की नियुक्ति स्टेट गर्वमेंट द्वारा की जाती है. सरकार की इच्छानुसार ही सरकारी वकील के पद पर रहा जा सकता है. वहीं, सरकार बदलने पर नई सरकार उन्हें पद से हटा भी सकती है.