टॉप 10 कातिल महिलाएंः किसी ने 45 अबोध बच्चों को पटककर मार डाला, तो कोई साइनाइड किलर

ये हुस्न का जानलेवा रुख है. ऐसी औरतें, जो इस कदर खूंखार थीं कि रोंगटे खड़े हो जाएं. वो और होंगी, जो निगाहों से कत्ल कर देती होंगी, ये तो बाकायदा हत्या करने वाली हैं. इनमें कोई सीरियल किलर है, तो कोई ऐसी हत्यारी कि आज तक इतिहास इन्हें भुला न पाया. कन्नड़ फिल्मों की स्टार मारिया को जानते हैं आप. इसने अपने गॉडफादर का कत्ल किया, फिर लाश के 300 टुकड़े कर डाले. एक मां और दो बेटी भी हैं, जो बच्चों को भीख मांगने के लिए बच्चों को चोरी करती थीं. लेकिन बच्चा अगर परेशान करता था, तो बच्चे को कभी जमीन पर पटककर तो कभी पैरों से कुचलकर मार डालती थीं. कुल 42 अबोध बच्चों को इन्होंने कत्ल किया. ऐसी ही 10 कातिल महिलाएं. इनके जुर्म की कहानियां आपको हिलाकर रख देंगी....

टॉप 10 कातिल महिलाएंः किसी ने 45 अबोध बच्चों को पटककर मार डाला, तो कोई साइनाइड किलर
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केडी केमपम्मा उर्फ साइनाइड किलर

इंसान कैसे चाहत से अपराध की तरफ अपने कदम बढा देता है केडी केमपम्मा इसका जीता-जागता उदाहरण है. उसकी पैसे कमाने की चाह देखते ही देखते लत में बदल गई और इसी लत में उसने कई महिलाओं को मौत की नींद सुला दिया. शुरुआत में वो सिर्फ महिलाओं को प्रसाद या खाने में साइनाइड देकर मारती और उनके गहने और पैसे लेकर चंपत हो जाती. मगर जेल की हवा खाने के बाद वो महिलाओं को पूजा-पाठ के जरिये हर समस्या का सामाधन कर देने का झांसा देकर उन्हें फंसाती और उनका सामान लूटकर गायब हो जाती. उसने दर्जन भर से ज्यादा महिलाओं को साइनाइड देकर उनकी हत्या की. साल 2008 में 45 साल की हो चुकी केमपम्मा का आखिरी शिकार 30 साल की नागवेणी थी, जिसकी हत्या कर भागी केमपम्मा को पुलिस ने बस स्टैंड पर धर दबोचा.

कातिल केडी केमपम्मा जो साइनाइड देकर लोगों को मौत के घाट उतार देती थी.

  42 बच्चों को चुराया और बेरहमी से सिर पटक कर किया उनका कत्ल

पुणे की यरवदा जेल, जिसमें 23 साल से दो सगी बहनें सजायाफ्ता है और इंतजार कर रही हैं अपनी फांसी का. अपराध 42 मासूम बच्चों की हत्या. जिन्होंने अपनी मां के साथ मिलकर एक के बाद एक 42 मासूम बच्चों को मौत की नींद सुला दिया. बच्चों को मौत देने का तरीका सुनकर आप भी दहल जाएंगे. इन सभी बच्चों में से किसी के नसीब खंभे से पटक-पटक कर मरना लिखा तो तो किसी के गले को पैरों से कुचल कर मरना. इन कातिलों का नाम है रेणुका, सीमा और इनके साथ इनकी मां अंजना को भी गिरफ्तार किया गया था जिसने बीमारी के चलते जेल में ही दम तोड़ दिया. जब इन्होंने अपना जुर्म कबूला तो आईपीसी में रेयरेस्ट ऑफ दी रेयर अपराध के तहत इन्हें फांसी की सजा हुई. हालांकि अब इनकी फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो गई है. मां अंजना गावित ने दो बार शादी की और दोनों बार ही उसके पति ने उसे छोड़ दिया. इन दोनों शादियों से अंजना को दो बेटियां हुआ. मगर पैसे की जरुरत ने अंजना को चोरी-चकारी के रास्ते पर धकेल दिया. एक दिन अंजना किसी गरीब महिला का बच्चा ये सोच कर चुरा लाई कि इसे बेचकर मुझे कुछ ज्यादा पैसे मिल जाएंगे. बच्चे को गोद में लिए अंजना ने एक आदमी का पर्स चुराया मगर पकड़ी गई. भीड़ ने अंजना को मारा तो उसने बच्चे को जमीन पर पटक दिया. जिससे लोगों का ध्यान बच्चे पर आ गया. बस फिर क्या था अंजना ने इसे हथियार बना लिया और इस काम में अपनी दोनों बेटी रेणुका और सीमा को भी शामिल कर लिया. ये तीनों गरीब औरतों के बच्चे चुराती और उनको लेकर भीख मांगती. बाद में इन बच्चों को बड़ी ही बेरहमी से मौत के घाट उतार देतीं. ये तीनों चार साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बनाती ताकि बच्चे किसी को कुछ बता ना पाएं. इनका ज्यादातर शिकार झुग्गियों में रहने वाले बच्चे होते थे क्योंकि पुलिस इन लोगों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देते थे. ये बच्चा चुराती और भीख मांगती, अगर पकड़ी जाती तो बच्चे को जमीन पर पटक देती ताकि लोगों का ध्यान बच्चे पर चला जाए और ये चोरी को अपनी मजबूरी बताकर वहां से निकल जाती. ये तीनों तब पकड़ी गईं जब मां अंजना ने अपने दूसरे पति मोहन की बेटी को मार दिया. मोहन की दूसरी पत्नी प्रतिमा ने पुलिस से शिकायत की और इन तीनों को पुलिस ने धर दबोचा.

ये तीनों कातिल मां-बेटियां जो बच्चों को चुराती थी भिख मांगती थी और काम हो जाने पर बच्चों को मार देती थीं.

नेहा वर्मा जो ब्यूटीशियन से बनी कातिल 

हाथों के जादू से किसी को भी खूबसूरत बनाने की अदा नेहा वर्मा में थी. मगर पैसा कमाने की चाह ने इन हुनरमंद हाथों में कत्ल की कहानी लिख दी. इंदौर के श्रीनगर में नेहा ने एक तिहरे हत्याकांड को अंजाम दिया. इस हत्याकांड में नेहा ने अपने दो दोस्तों की भी मदद ली. इंदौर के श्रीनगर इलाके देशपांडे परिवार को खत्म करने की साजिश नेहा वर्मा ने 19 जून 2011 को की. मगर देशपांडे परिवार को नेहा ने कुछ दिन पहले ही चुना जब नेहा ने मेघा देशपांडे को शहर के एक शापिंग माल में देखा, जहां नेहा सोने के जेवरात से लदी हुई थी. नेहा एक मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी के ब्यूटी प्रोडक्ट बेचती थी. उसने इस कंपनी से जुड़ने की बात कहकर मेघा देशपांडे का मोबाइल नंबर हासिल किया. और रातों-रात अमीर बनने के सपने को सच करने के लिए अपने दो दोस्त राहुल चौधरी उर्फ गोविंद और मनोज आटोद के साथ 19 जून 2011 को मेघा के घर पहुंची. नशे में धुत उन दोनों ने मेघा, उसकी मां रोहिणी और बेटी अश्लेषा की पहले गोली मारी और फिर धारदार हथियारों उनकी हत्या कर दी और उनके घर से डेढ़ लाख रुपए का माल लूटकर फरार हो गए. नेहा के पिता वैन चलाया करते थे. पहले नेहा ने टेलीमार्केटिंग का काम किया और इसी दौरान वो शहर के एक स्पा से ब्यूटीशियन के रुप में जुड़ गई. मामला खुलने के बाद नेहा और उसके दोनों साथी पुलिस की गिरफ्त में थे. ये हत्याएं इतना क्रूर तरीके से की गई थी कि कोर्ट ने 27 साल की नेहा को फांसी की सजा सुनाई. इस तिहरे हत्याकांड मे नेहा को सबसे पहले सेशन कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई जिसे हाईकोर्ट और सुप्रिम कोर्ट दोनों ने ही बरकरार रखा. केस लंबा चला मगर सेशन कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद नेहा डिप्रेशन में आ गई. मगर वक्त ने नेहा को सामान्य किया. जेल में महिला सशक्तीकरण विभाग ने कैदियों के लिए तीन महीने का कौशल उन्नत कार्यक्रम के तहत तीन महीने का ब्यूटीशियन का कोर्स कराया तो नेहा ने जेल में रहकर ही इस कोर्स को पूरा किया.

ब्यूटीशियन से कातिल बनी नेहा वर्मा.

ककूरगाची की कातिल जिसका सुराग ही नहीं मिला

सबसे पहली महिला सीरियल किलर का चेहरा 8 नवबंर 1883 को सामने आया मगर लोगों को न उसका नाम पता चला और न ही उसके खिलाफ कोई सबूत ही हाथ लगा. ये महिला अपने शिकार को उसकी स्मार्टनेस या रहीसी के तराजू पर तोलकर ही चुनती थी. कोलकाता की रहने वाली ये महिला जिस भी इंसान को मारने के लिए चुनती थी उसे शहर से बाहर सुनसान इलाका जो कि ककूरगाची के नाम से जाना जाता था वहां बुलाती थी. बुलाने वाले लोगों को वो ये जगह अपने गुरु का आश्रम बताती थी. वहीं पर पानी का एक कुंड था जिसमें वो लोगों को शुद्धि के लिए स्नान करने को कहती थी. और जैसे ही लोग वहां स्नान करने के लिए डुबकी लगाते थे वो उनका सिर पानी के अंदर डूबा देती थी और लोगों को मौत के घाट उतार देती थी. आसपास का इलाका बहुत सुनसान था इसलिए मदद के लिए निकली उन लोगों की आवाज किसी को सुनाई नहीं देती थी. मगर जब इस कातिल ने अपने पांचवें शिकार को इसी तरह मारने की कोशिश की तो उसकी किस्मत ने उसे बचा लिया. उस कुंड से थोड़ी ही दूरी पर कुछ मछुवारे तालाब में मछली पकड़ रहे थे. चीख सुनकर वो देखने के लिए दौड़ पड़े. उन्होंने देखा कि वहां पहले से चार और लाशें पानी में तैर रही है. उन्होंने पकड़ के उस महिला को पुलिस के हवाले कर दिया मगर पुलिस ये साबित नहीं कर सकी कि ये सभी कत्ल इस महिला ने किए हैं.

 ये है ककूरगाची का वह कुंड जिसमें वो हत्यारन लोगों को मौत देती थी.

सिमरन सूद ने अपने हुस्न के जाल में फंसाकर दी मौत 

सिमरन सूद जो खूबसूरती और शातिरपने की ऐसी काकटेल थी कि उसके जाल में जो फंसा उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. रहीसों को अपने हुस्न का दीवाना बनाकर उनके साथ रोमांस करती और जब वो पूरी तरह से उसके हुस्न के जाल में फंस जाते तो अपने दोस्त के हाथों उसे मरवा देती. ये सारा काम वो पैसा कमाने के लिए करती थी जिसमें उसका दोस्त विजय प्लांडे पूरा साथ देता था. यह मॉडल दिल्ली के रहने वाले एक्टर-प्रोड्यूसर करण कुमार कक्कड़ के अपहरण और उनकी हत्या में आरोपी है. खास बात यह है कि इस खतरनाक खूनी खेल में मॉडल का साथ देता था उसका करीबी विजय प्लांडे. दरअसल प्लांडे ही इस खेल का असली मास्टर माइंड था. प्लांडे पर तीन हत्याएं करने का आरोप था. लोगों को हनीट्रैप में फंसाने वाली सिमरन नाम कमाने की हसरत लिए अपना घर छोड़ मुंबई आ गई और घरवालों से दूर होती चली गई. खुद को खूबसूरत बनाए रखने के लिए सिमरन ने की बार कास्मेटिक सर्जरी का सहारा लिया था. सिमरन को चकाचौंध भरी जिंदगी पसंद थी और जिसके लिए विजय और सिमरन मिलकर योजना बनाते थे. अपनी जोड़ी को हिट मानते हुए साल 1998 में इन दोनों ने शादी कर ली. इन्होंने 1998 में एयर इंडिया के इंजीनियर अनूप दास और उसके पिता स्वराज रंज दास की हत्या भी हनीट्रैप के जरिये की थी. जिसके बाद विजय को जेल हुई और वो साल 2002 में पैरोल पर बाहर आया और अचानक गायब हो गया. मगर वो सिमरन के टच में था. इसके बाद सिमरन ने साल 2004 में कुछ फिल्मों में काम किया. सोशल नेटवर्किंग साइट पर सिमरन की कई सारी तस्वीरें बड़े बिजनेसमैन, फिल्म स्टार, क्रिकेटर्स के साथ हैं. साल 2012 में पुलिस ने सिमरन सूद और विजय प्लांडे को करण कक्कड़ की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया.

 अपनी कातिल अदाऔं का सहारा लेकर कत्ल करने वाली सिमरन सूद.

मारिया मैथ्यू - लाश के किए तीन सौ टुकड़े 

मारिया सुसीराज कन्नड़ फिल्मों की अभिनेत्री के तौर पर संघर्ष कर रही थी और नीरज ग्रोवर एक प्रोडक्शन हाउस में बतौर मीडिया एग्जीक्यूटिव का काम करता था. नीरज मारिया को उसकी प्रोफेशनल लाइफ में आगे बढ़ने में मदद करता था. 6 मई 2008 को मारिया सुसीराज ने मलाड में अपने नये अपार्टमेंट में शिफ्ट हो रही थीं. नीरज उस दिन सुसीराज की मदद कर रहे थे और इस दिन नीरज ने तय किया की वो सुसीराज के नए घर में ही रुकेगा. अगले दिन यानी 7 मई को मारिया का मंगेतर एमिल जेरोम मैथ्यू अचानक घर आ पहुंचा. मैथ्यू नेवी में लेफ्टिनेंट ऑफिसर था. मारिया के बेडरुम में नीरज को देख मैथ्यू आगबबूला हो गया. मैथ्यू ने घर में रखे चाकू से नीरज पर हमला किया. दोनों के बीच झड़प हुई लेकिन मैथ्यू ने नीरज पर धारदार चाकू से इतने हमले किये कि उसकी वहीं मौत हो गई. रात भर नीरज की लाश को वहीं रखा और सुबह मारिया पास के ही एक माल से एक चाकू और तीन बैग लेकर आई. मारिया और मैथ्यू ने मिलकर नीरज की लाश के 300 टुकड़े कर तीन अलग-अलग थैलों में भरा. नीरज की लाश के टुकड़ों को सुनसान जंगल में ले जाकर जला दिया. कुछ समय कयास लगाने के बाद मारिया ने नीरज के मर्डर का खुलासा किया. बाद में अदालत ने मैथ्यू को गैर इरादतन हत्या और मारिया को सबूत मिटाने का दोषी पाया. सजा के दौरान बायकोला जेल में बंद मारिया की मुलाकात परोमिता और अनीता से हुई. परोमिता एक महिला के साथ करोड़ों की ठगी के मामले में सजा काट रही थी और अनीता एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से पचासकरोड़ रुपए के चेक चोरी करने की सजा काट रही थी. ये तीनों जेल से बाहर आ और अपनी दोस्ती जेल के बाहर भी बरकरार रखी. इन तीनों ने मिलकर कई लोगों के साथ करीब 33 करोड़ रुपए की ठगी की.

कन्नड़ फिल्मों की अभिनेत्री और कातिल मारिया मैथ्यू के साथ उसका मंगेतर और कातिल एमिल जेरोम मैथ्यू और मृतक नीरज ग्रोवर.

ड्रग माफिया शशिकला पाटणकर उर्फ बेबी 

जिस ड्रग्स का तानाबाना सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती से होते हुए कंगना रनौत तक पहुंची थी उसकी शुरुआत बेबी उर्फ शशिकला पाटणकर से शुरु हुई. बेबी सात साल पहले जब पकड़ी गई तो कई पुलिस अफसरों की नौकरी से छुट्टी हो चुकी थी. ये पहला मामला था जिसमें पुलिस स्टेशन से ड्रग्स बरामद हुई थी. करीब सात साल पहले रिटायर्ड एसीपी अवधूत चव्हाण ने शशिकला पाटणकर उर्फ बेबी की सारी कहानी बताई. बेबी का बचपन वरली के कोलीवाडा में बीता. वहीं के गुंडे मारिया को बेबी के चार भाइयों ने झगड़े के बाद मार दिया हुआ और जेल चले गए. इसके दो महीने बाद ही बेबी के माता पिता की भी मौत हो गई. तब बेबी छह साल की थी. बेबी के साथ उसका छोटा भाई था सो उसने घर-घर जाकर का किया. एक गैराज में नौकरी की. 15 साल में बेबी ने शादी की मगर पति रमेश शराबी था और साल 1991 में दिल के दौरे से उसकी मौत हो गई. उसने फिर काम ढूंढा. इसी बीच उसके भाई सजा पूरी करके रिहा हो गए. बेबी अपने भाई के घर रहती थी जहां घर में चोरी हो गई. तफ्तीश के लिए आई पुलिस में धर्मा कालोखे भी था जिसकी बेबी से नजदीकियां बढ़ गई. भाई के साले के पड़ोस में रहने वाला आयूब ड्रग्स बेचता था. जब वो मुंबई से बाहर जाता तो ड्रग्स बेबी के घर रख देता और बेबी उसे बेचती. साल 1997 में अयूब की मौत हो गई और बेबी इस धंधे में उतर आई. 9 मार्च 2015 में पुलिस ने बेबी के साथा और पुलिसवाले धर्मा कालोखे के ठिकानों पर छापा मारा तो वहां से 110 किलो ड्रग्स मिली. अगले दिन मरीन लाइंस पुलिस स्टेशन में उसके लॉकर से 12 किलो ड्रग्स और बरामद हुई. धर्मा ने बेबी का नाम लिया. अपनी लग्जरी बस में कुराड से मुंबई जा रही बेबी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उसने पुलिस डिपार्टमेंट के कई लोगों से अपनी दोस्ती के बारे में बताया, साथ ही धर्मा के ठिकाने की टिप भी उसी ने पुलिस को दी. पूरे मुंबई में ड्रग्स की मेन सप्लाई बेबी ही करती थी जिससे उसने न जाने कितने लोगों को नशे की लत लगा दी और न जाने कितने ही लोग इस वजह से मौत की नींद सो गए. बेबी के बेटे गिरीश ने उसे धमकी दी कि अगर वो इस धंधे में रही तो वो खुदकुशी कर लेगा मगर धर्मा उस पर ड्रग रैकेट में बने रहने का दबाव बनाता रहा. बेबी के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हुई जिसके बाद बेबी समझ गई कि धर्मा उसे धोखा दे रहा है. खंडाला और मरीन लाइंस से जो ड्रग्स जब्त हुई पुलिस ने कहा कि वो ड्रग्स थी मगर फॉरेंसिक रिपोर्ट में इसे अजीनोमोटो बताया गया जो चाइनीज खाने में इस्तेमाल होता है. बेबी ने अपने तमाम पुलिस दोस्तों की मदद से बड़ी संपत्ति खड़ी की जिसमें 22 बैंक एकाउंट और 1.45 करोड़ की एफडी, कई शराब की दुकानें, कई पॉश जगहों पर आलिशान बंगले शामिल थे.

ड्रग्स और अपराध की दुनिया का चेहरा बनी शशिकला पाटणकर उर्फ बेबी. 

इश्क के चक्कर में अपनों को ही कुल्हाड़ी से काट डाला

यूपी के अमरोहा जिले का गांव बावनखेड़ी. रात के करीब दो बजे अचानक एक लड़की के जोर-जोर से चीखने की आवाजें आने लगती हैं. पड़ोसी इकट्ठा होकर घर में घुसते हैं तो घर के हालात देखकर भौचक्के रह जाते हैं. घर के आंगन में सात लाशें पड़ी थीं. परिवार के नाम पर अब बस अकेली शबनम ही जिंदा बची थी. यहां शबनम के मां-बाप, दो भाई एक भाभी, एक मौसी की बेटी और शबनम का एक भतीजा मरे पड़े थे. शबनम बच गई थी और गांव के लोग ये सब देखकर कुछ भी नहीं समझ पा रहे थे कि ये क्या हुआ. अचानक ये सब कैसे हो गया. पूछने पर शबनम ने बताया कि घर में कुछ गुंडे घुस आए थे जिन्होंने सबको मार दिया और शबनम इसलिए बच गई कि वो बाथरुम में थी. पुलिस की तफ्तीश शुरु हुई मगर कहीं किसी गुंडे के होने का कोई सबूत नहीं मिला. हत्यारे ने इन सभी को कुल्हाड़ी जैसी चीज से मारा था. पुलिस ने तफ्तीश में जाना कि वो लुटेरे नहीं थे जिन्होंने शबनम के पूरे परिवार का कत्ल किया और ऐसा कोई सबूत नहीं था जिससे पता चले कि मृतकों ने खुद को बचाने की कोई कोशिश की है. पुलिस की जांच में शबनम की इस सजती हुई सी कहानी के झोल सामने आने लगे. सच सही में बहुत घिनौना था. अब पुलिस इन हत्याओं के पीछे की वजह तक पहुंच नहीं पा रही थी. सिर्फ शबमन ही थी जो सच बता सकती थी इसलिए पुलिस ने सख्त रवैया अपनाते हुए शबनम से पूछताछ की तो ये कत्ल शबनम और सलीम की प्रेम कहानी से जुड़ने लगो. शबनम और सलीम एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते थे मगर शबनम के परिवार को सलीम सख्त नापसंद था. फिर इसके बाद शबनम और सलीम ने मिलकर इन सातों की मौत का जाल बुना. तय प्लान के मुताबिक  शबनम ने इन सभी को खाने में नशीली दवा मिलाकर खिला दी और जब सब बेहोश हो गए तो सलीम के साथ मिलकर एक-एक कर अपने ही परिवार के सब सदस्यों को कुल्हाड़ी से काट डाला. 15 अप्रैल साल 2008 में हुई इस भयानक घटना के कातिलों का चेहरा सामने आने पर नीचली कोर्ट ने शबनम और सलीम को फांसी की सजा सुनाई और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फांसी की सजा को बरकरार रखा. शबनम और सलीम की माफी याचिका को राष्ट्रपति द्वारा भी अस्वीकार कर दिया गया. जब शबनम का जुर्म साबित हुआ तब वो दो महीने की प्रगनेंट थी. आज वो बच्चा 14 साल का है. इस्लाम में गोद लेने के कोई नियम तो नहीं है मगर इस वक्त वो बच्चा एक पत्रकार के पास है.

 अपने ही परिवार के सात लोगों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम और संग में प्रेमी सलीम.

 

 

इंद्राणी मुखर्जी बनी अपनी ही बेटी की कातिल

ये देश का बहुचर्चित मर्डर केस है जिसमें एक मां ने अपनी ही बेटी को मौत के घाट उतार दिया. इंद्राणी मुखर्जी जो कि आईएक्सएन न्यूज में सीईओ के पद पर थी, जिसे 25 अगस्त 2015 को मुंबई पुलिस नें अपनी ही सगी बेटी शीना बोरा के कत्ल में शामिल होने पर गिरफ्तार कर लिया गया. बेटी को मारने के बाद उसकी लाश को ठिकाने लगाने के लिए कार में अपने साथ लेकर सड़कों पर घूमती रही. इंद्राणी की निशानदेही पर उसकी बेटी शीना बोरा की बॉडी भी पुलिस के हाथ लगी, मगर कंकाल के रुप में. साल दर साल इस मामले में नए खुलासे होते रहे है और मर्डर केस में कई बड़े लोगों का भी नाम सामने आया. ये एक हाईप्रोफाइल मर्डर केस कहा जा सकता है जिसमें आज किसी को सजा नहीं मिली. हाल ही में सजायाफ्ता इंद्राणी ने सीबीआई के लिखे एक लैटर में बताया है कि शीना बोरा जिंदा है और उसे कश्मीर में तलाशना चाहिए. शीना बोरा मर्डर केस पिछले छह साल से मिस्ट्री बना हुआ है, जो कि सुलझने का नाम नहीं ले रहा है.

एक हाई प्रोफाइल मर्डर केस की कातिल इंद्राणी मुखर्जी.

अपनों और समाज की सताई फूलन देवी बनी कातिल

यूपी के जालौन जिले के गोरहा गांव में 10 अगस्त 1963 में एक गरीब मल्लाह देवी दीन के घर बेटी का जन्म हुआ, जिसका नाम फूलन रखा गया. उस समय घर में बेटी का जन्म परिवार के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं था. पिता ने छोटी सी उम्र में फुलन की शादी एक अधेड़ उम्र के आदमी के साथ कर दी. मगर वो शादी भी नहीं चली. इसके बाद गांव के ही कुछ लोगों ने फूलन को अगवा किया और बंधक बनाकर उसके साथ कई दिनों तक रेप किया. अपनों और समाज की सताई फूलन देवी ने हथियार उठाए और डाकू बन गई. फूलन देवी ने एक साथ 21 लोगों को खड़ा करके गोली मार दी. ये सब लोग फूलन के दोषी थे. जिसके बाद फूलन देवी बैंडिट क्वीन के नाम से फेमस हुई. फूलन देवी के जीवन पर एक फिल्म भी बनी जिसने सुर्खियां तो बटोरी ही मगर साथ ही विवाद भी खड़े किये. फूलन देवी पर 22 कत्ल, 30 लूट और 18 अपहरण का मुकदमा चलाया गया. अपनी शर्तों पर फूलन ने हथियार डाले और साल 1996 में उसने राजनीति में तदम रखा. समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार फूलन संसद चुनाव में खड़ी हुई और दो बार मिर्जापुर के लिए संसद सदस्य के रुप में लोकसभा के लिए चुनी गी. एक फिइस बदले का सिलसिला इसी तरह चलता रहा. मगर 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उसके आवास के बाहर ही शेर सिंह राणा नाम के शख्स ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी.

राजनीति का चेहरा बनी फूलन देवी.