द ब्रेन ईटरः एक ऐसा सीरियल किलर, जो अंडरग्राउंड कांच के बॉक्स में है कैद

- इतना खतरनाक कि बॉक्स से कभी न निकालने के आदेश - एक व्यक्ति को मारकर खा गया था उसका दिमाग

द ब्रेन ईटरः एक ऐसा सीरियल किलर, जो अंडरग्राउंड कांच के बॉक्स में है कैद
कॉन्सेप्ट के लिए साइलेंस ऑफ द लैंब में हेनीबल लेक्टर के किरदार का फोटो. साभार

रॉबर्ट जॉन मौडस्‍ले इंग्‍लैंड का एक खूखांर सीरियल किलर है. जो अंडरग्राउंड कैद है एक कांच के बॉक्स में. मौत तक उसे इसी बॉक्स में रखने का आदेश है. वहशी इतना कि अपने एक शिकार का दिमाग ही खा गया. और इसके साथ उसका नाम पड़ा ब्रेन ईटर. साइसलेंस ऑफ द लैंब का रिक्टर हैनीबल का नाम याद है आपको. वह इसी के किरदार से प्रेरित बताया जाता है. मैडस्ले ने अधिकतर कत्ल जेल के अंदर ही अंजाम दिए. शातिर इतना है कि वह कानून से आंख-मिचौली खेलता रहा.

सेल में कैद सीरियल किलर रॉबर्ट

द ब्रेन ईटर

रॉबर्ट जॉन मौडस्ले एक अंग्रेजी सीरियल किलर है. मौडस्ले ने चार लोगों की हत्या की,  जिनमें से तीन हत्याएं उसने जेल में एक हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा पाने के दौरान की थीं. कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि उसके द्वारा जेल में मारे गए लोगों में से एक के मस्तिष्क का हिस्सा खा लिया, जिससे उसे ब्रिटिश प्रेस के बीच हैनिबल द कैनिबल और अन्य कैदियों के बीच "द ब्रेन ईटर" उपनाम मिला हुआ था.

बन गया सेक्‍स वर्कर

1960 के दशक के अंत में मौडस्ले ने सेक्स वर्कर के रूप में काम शुरू कर दिया था. उसे नशे की लत लग चुकी थी और जिसके लिए उसे पैसे की जरूरत होती थी. वह मनोरोगों से घिर चुका था. उसने कई डॉक्टरों को भी दिखाया. उसका कहना था कि उसे कुछ आवाजें सुनाई देती थीं, जो उससे कहती थी कि अपने माता-पिता की हत्या कर दे. नशीली दवाओं की लत के दौरान ही उसने पहला कत्ल किया.

 मौडस्‍ले द्वारा की गई हत्‍याएं

मौडस्‍ले ने 1974 में वुड ग्रीन, लंदन में जॉन फैरेल की गला घोंटकर हत्‍या कर दी. उसका दावा था कि फैरेल ने उसे कुछ तस्वीरें दिखाई थीं, जिसमें वह बच्चों का यौन शोषण कर रहा था. हत्या के बाद उसने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया. उसने पुलिस को बताया कि वह मनोरोगी है. अदालत ने उसे मनोरोगी मानते हुए ब्रॉडमूर अस्पताल भेज दिया. वहा उसका सेलमेट था डेविड चीजमैन. डेविड और मौडस्ले ने डेविड फ्रांसिस नाम के एक अन्य कैदी को अपने सेल में बंद कर लिया. नौ घंटे तक सेल अंदर से बंद रहा. पुलिस ने सेल को खुलवाने की पूरी कोशिश की. इस दौरान उसने फ्रांसिस को मौत के घाट उतारने तक टार्चर किया. फ्रांसिस बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले में जेल में बंद था. यह कत्ल इतना वीभत्स था कि अदालत ने उसे आजीवन कारावास सुनाई. साथ ही हिदायत दी कि पैरोल या किसी भी अन्य तरीके से वह जेल के बाहर नहीं जाएगा.

वेकफील्ड जेल.

दो अन्‍य साथी कैदियों की हत्‍या

1978 में मौडस्ले ने वेकफील्ड जेल में दो और कैदियों को मार डाला. एक ही दिन में दो हत्याएं, वह भी जेल में. पत्नी के कत्ल में सजा काट रहे साल्नी डोरवुड नाम के एक शख्स को उसने अपने सेल में बुलाया. वहां पहले उसका गला घोटा, फिर चाकू से सिर धड़ से अलग कर दिया. इसके बाद उसने दूसरा शिकार खोजा. विंग में उसने बिल रॉबर्ट्स का बेरहमी से कत्ल किया. दोनों कत्लों को अंजाम देने के बाद वह घूमता हुआ गार्ड के पास पहुंचा और बताया कि शाम की गिनती में आपको दो कैदी कम मिलेंगे.

एकांत कारावास

हत्‍याओं को देखते हुए 1983 में उसको जेल की एक सामान्य सेल के लिए बहुत खतरनाक माना गया था. मौडस्‍ले की क्राइम हिस्‍ट्री के कारण उसकी सेल के बाहर कम से कम चार जेल अधिकारियों को उस पर नजर रखने के लिए तैनात किया जाता था. जेल अधिकारियों ने वेकफील्ड जेल के बेसमेंट में टू-सेल यूनिट का निर्माण किया. यह लगभग 5.5 गुणा 4.5 मीटर (18 गुणा 15 फीट) की औसत से थोड़ी बड़ी सेल होती हैं. इनमें बड़ी बुलेटप्रूफ खिड़कियां होती हैं जिनके माध्यम से उसे देखा जा सकता है. उसकी सेल में केवल एक मेज और एक कुर्सी है, दोनों कम्‍प्रेस कार्डबोर्ड से बनी हैं. शौचालय और बेसिन को फर्श से जोड़ा गया है, जबकि बिस्तर के रूप में एक कंक्रीट स्लैब है. एक ठोस स्टील का दरवाजा सेल के भीतर एक छोटे से पिंजरे में खुलता है, जो मोटे पारदर्शी ऐक्रेलिक पैनलों में घिरा होता है.  जिसके नीचे एक छोटा सा स्लॉट होता है, जहां से अधिकारी उसे भोजन और अन्य सामान देते हैं.

एक घंटे के लिए आता है बाहर

मौडस्‍ले रोजाना एक घंटे के लिए अपनी सेल से बाहर आता है. छह जेल अधिकारी इस दौरान उसके आस-पास तैनात रहते हैं. उसे किसी अन्य कैदी से संपर्क करने की अनुमति नहीं है.  वर्तमान समय में मौडस्‍ले की उम्र करीब 69 है. रॉबर्ट मौडस्ले की प्रत्‍येक अपील को खारिज करते हुए उसे अपने अंडरग्राउंड कांच के बने सेल में अंतिम सांस तक रहने के निर्देश हैं.

प्रारंभिक जीवन के गहरे निशान

रॉबर्ट मौडस्ले अपने माता-पिता की 12 बच्चों संतानों में से एक था. उसका जन्म लिवरपूल के स्पीके में 26 जून 1953 को हुआ था. मौडस्‍ले ने अपने प्रारंभिक वर्ष क्रॉस्बी में एक कैथोलिक अनाथालय में बिताए थे. जब वह आठ साल का था तो उसके माता-पिता उसको अनाथालय से वापस अपने पास ले आए. मौडस्ले का कहना है कि दिन-रात उसका शारीरिक शोषण हुआ. सिक्योरिटी सर्विस को जब तक भनक लगी, जॉन अंदर से बिखर चुका था. उसका दावा था कि बचपन में उसका यौन शोषण भी हुआ, जिसके जख्म उसे दिलो-दिमाग पर आज तक हैं. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि रॉबर्ट की हत्याएं भी यही दर्शाती हैं.