बिहार में सियासी तूफान: राजनीतिक उठापटक के चलते सभी MLA को कांग्रेस ने पटना में बुलाया, सत्ता को लेकर चर्चाएं तेज

अभी महाराष्‍ट्र की राजीनीति का तूफान शांत हुआ तो अब बिहार में सियासी तूफान खड़ा हो गया है. जहां भाजपा और जदयू में खटपट के चलते सियासत गर्मा गई है. वहीं बिहार के सीएम की कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी से मुलाकात की खबरे भी सामने आ रही है. खबर है कि कांग्रेस ने अपने सभी एमएलए को पटना बुलाया है. कयासों में बिहार की राजनीति के रूख को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.

बिहार में सियासी तूफान: राजनीतिक उठापटक के चलते सभी MLA को कांग्रेस ने पटना में बुलाया, सत्ता को लेकर चर्चाएं तेज
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बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल

बिहार की राजनी‍ति में हलचल से सियासत को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम है. वहीं बिहार की एनडीए सरकार में भाजपा और जदयू के बीच रिश्तों में खटपट के संकेत मिल रहे हैं. जिसके चलते विपक्षी पार्टियों में हलचल बढ़ गई है. आरजेडी के बाद अब कांग्रेस ने भी अपने सभी विधायकों को पटना में तलब किया है. दरअसल कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की नीतीश कुमार से बातचीत की खबरें सामने आई थीं. दोनों नेताओं की इस बातचीत के बाद कांग्रेस ने ये फैसला लिया है. बिहार में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर सभी विधायकों को सोमवार शाम 6 बजे तक पटना पहुंचने निर्देश है.

 

विधायकों से बातचीत के बाद बदलेगी रूप रेखा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मदन मोहन झा ने कहा कि बिहार में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और जदयू द्वारा अपने सांसदों और विधायकों की बैठक बुलाए जाने के बाद हर पॉलीटिकल डेवलपमेंट पर कांग्रेस की नजर बनी हुई है. मदन मोहन झा ने कहा कि आज राज्य और देश में स्थितियां ऐसी बन गई है जिससे लगने लगा है कि बीजेपी पूरी तरीके से अलग-थलग पड़ गई है. मदन मोहन झा ने कहा कि बिहार में घटना चक्र जितना तेजी से बदल रहा है वैसे में कांग्रेसी भी चाहती है कि वह अपने विधायकों से सलाह मशवरा कर लें. हांलाकि अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान को लेना है.

 

बीजेपी के खिलाफ लामबंदी

बिहार की सियासत के बाद देखा जा रहा है कि धीरे-धीरे वहां कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ लामबंद होती दिख रही है. इसको लेकर मदन मोहन झा ने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी का जो काम करने का तरीका है, उससे ना केवल राजनीतिक पार्टियां बल्कि जनता भी त्रस्त है और इसलिए कांग्रेस चाहती है कि बीजेपी की सरकार जितना जल्दी हो सके, यहां से चली जाए. हालांकि मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव कांग्रेस को कौन पसंद है, इस सवाल पर मदन मोहन झा ने कहा कि इसका जवाब देना काफी मुश्किल है, लेकिन कांग्रेस इतना जरूर चाहती है कि बिहार में सेक्यूलर सरकार का गठन हो जाए. मदन मोहन झा ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई के खिलाफ जिस तरीके से हम सड़कों पर उतरे और राजद का समर्थन मिला है वैसे मैं पूरी तरीके से राजद और कांग्रेस बिहार में साथ हैं.

 

यहां से शुरू हुई सियासत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बीती छह जुलाई को पटना के पारस अस्पताल में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ग्राउंड फ्लोर पर बने वीवीआइपी वार्ड में लालू यादव से मिलने पहुंचे थे. इसके बाद से ही सियासत में गर्मी दिखने लग गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक लालू यादव की बीमारी के दौरान जिस तरीके से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और खुद उनके कई मंत्री लालू यादव का हालचाल ले रहे थे, उससे दोनों नेताओं के बीच की दूरियां कम होती दिख रही थीं. जानकारों का कहना है कि लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव के नीतीश कुमार और उनके पार्टी के नेताओं के बीच में बिहार के राजनीतिक समीकरणों पर खुलकर के चर्चा हुई. क्योंकि नीतीश कुमार लगातार भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों समेत दिल्ली या अन्य जगहों पर होने वाले बड़े आयोजनों से दूरी बनाए हुए थे. उससे जेडीयू और आरजेडी के बीच में आपसी तालमेल को लेकर मजबूत बल मिलता रहा.

 

लालू के साथ नीतीश का अपनापन

बताया जाता है कि लालू यादव को जिस तरीके से नीतीश कुमार के अपनेपन वाले प्रयासों की वजह से एम्स में दाखिल कराया, उससे न सिर्फ जेडीयू के नेता बल्कि आरजेडी के नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला भी दिल्ली में शुरू हुआ. बिहार की राजनीति को करीब समझने वालों का तो यहां तक कहना है कि जिस दौरान लालू यादव एम्स में भर्ती थे, उसी दौरान जदयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह भी पटना से दिल्ली इलाज के लिए आए थे. सूत्रों का कहना है कि इसी दौरान वशिष्ठ नारायण सिंह को देखने के लिए पटना से जेडीयू और आरजेडी के बड़े-बड़े रणनीतिकारों का दिल्ली एम्स में आना-जाना बना हुआ था.

 

एम्‍स से शुरू हुई चर्चाएं

माना जा रहा है कि एम्‍स अस्पताल के इस परिसर में ही बिहार के बदलते सियासी समीकरणों ने जमकर जोर पकड़ा. क्योंकि यहां पर राजनीतिक दलों के नेताओं का मिलना न सिर्फ आसान था, बल्कि सियासी समीकरणों को साधते हुए बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाना भी बहुत सरल हो चुका था. लालू यादव के दिल्ली एम्स में दाखिल रहते हुए कांग्रेस के नेता राहुल गांधी भी उनसे मिलने के लिए पहुंचे थे. चर्चाएं तभी तेज होने लगी थीं कि बिहार कि राजनीति में जल्द ही बहुत कुछ बड़ा होने वाला है.