तहसीलदार ने भगवान शिव को किया तलब, ठेले में शिवलिंग को लादकर पहुंचे भक्‍त

ओह! माई लोग, आपने सही पढ़ा यह ‘लोग’ ही लिखा हुआ. क्‍योंकि तहसीलदार साहब ने “ओ माई गॉड" फिल्‍म देखी और वो परेश रावल बन बैठे. इन महाशय ने भगवान शिव को नोटिस जारी कर कोर्ट में तलब किया. नहीं आने पर जुर्माना भी लगाया, बस अब भगवान को तो जाना ही था. ऐसे में भक्‍तों ने भगवान शिव के शिवलिंग को ठेले में लादा और पहुंच गए कोर्ट. मामला बड़ा दिलचस्‍प है, आखिर तक पढि़ए.

तहसीलदार ने भगवान शिव को किया तलब, ठेले में शिवलिंग को लादकर पहुंचे भक्‍त
Notice to Lord Shiva

ये है मामला

दरअसल तहसील कोर्ट ने जमीन कब्जे के मामले में शिव मंदिर समेत 10 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कोर्ट में तलब किया है. तहसील कोर्ट ने शिव मंदिर (Shiv Temple) को पक्षकार बनाया है, इसमें शिव मंदिर के पुजारी या ट्रस्टी के नाम का उल्लेख नहीं है, इस कारण भगवान शिव (Lord Shiva) ही पक्षकार माने जा रहे हैं. शिव मंदिर समेत 10 लोगों को 23 मार्च को कोर्ट में प्रस्तुत होकर अपना पक्ष रखना था. नोटिस में ये भी लिखा गया कि सुनवाई में नहीं आने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना तथा जमीन से बेदखली की कार्रवाई की जा सकती है.

 

महिला ने दायर की थी याचिका

ये अजीबोगरीब मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ नगर निगम के वार्ड नंबर 25 का है. यहां पर अवैध भूमि कब्जे के एक मामले में तहसीलदार कोर्ट ने भगवान शिव को तलब किया है. इतना ही नहीं उनको मंदिर के कागज लेकर समय से कोर्ट पहुंचना होगा वरना उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई भी होगी. अब मामला बता देते हैं, नगर निगम के वार्ड नंबर 25 में रहने वाली एक महिला सुधा राजवाड़े ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की थी. याचिका में महिला ने कहा था कि जहां पर उनकी भूमि है, उस रास्ते में लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है. इस वजह से उनको अपनी भूमि तक पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं मिल पा रहा है. महिला की याचिका पर हाईकोर्ट गंभीर हो गया और कोर्ट ने तहसीलदार को मामले में कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया. इसी के बाद तहसीलदार कोर्ट ने अवैध कब्जों के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने और अपनी भूमि के कागज लेकर कोर्ट में आने का आदेश जारी किया.

 

नोटिस में शिव मंदिर भी शामिल

अजीब बात ये है कि उन 10 लोगों में भगवान शिव के मंदिर का भी नाम था. इस नोटिस को जिसने भी देखा वो हैरान हो गया. गांव में तालाब के पास बने शिव के मंदिर को कोर्ट से नोटिस जारी किया गया, गांव में ये खबर आग की तरह फैल गई. नोटिस में शिव मंदिर को सीधे ही नोटिस जारी कर कोर्ट में तलब कर लिया गया है, इसको लेकर जोरों से चर्चा चलने लगी. लोग सोच में पड़ गए कि आखिर भगवान खुद कैसे कागज लेकर कोर्ट में जाएंगे. ऐसे में लोगों की जो समझ में आया कि अब वो क्‍या करें. बताया जाता है कि ये लोग भगवान शिव के शिवलिंग को लेकर कोर्ट पहुंच गए. जहां इन्‍होंने अपना पक्ष रखा.

 

हाईकोर्ट के निर्देश

नोटिस जारी करते हुए नायब तहसीलदार विक्रांत सिंह ठाकुर ने कहा है कि हाईकोर्ट के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है. मामला सरकारी जमीन पर बेजा-कब्जे का है. हाईकोर्ट में 16 लोगों के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, लेकिन स्थल जांच में 10 लोगों का ही नाम सामने आये हैं. नोटिस में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (Chhattisgarh Land Revenue Code) के नियमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि आप लोगों का यह कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है. जुर्माने की राशि नहीं पटाने पर भगवान शिव समेत सभी 10 को उक्त जमीन से बेदखल किया जाएगा. वहीं नियत तिथि तक उक्त जमीन पर कोई निर्माण नहीं किया जा सकेगा.

 

तहसीलदार ने मानी अपनी गलती

भगवान शिव को नोटिस और कोर्ट में तलब करने के लिए मामले ने जब तूल पकड़ा तो तहसीलदार ने भी इसको संज्ञान में लिया. फिर क्‍या था, तहसीलदार को गलती का पता चलते ही तहसील कोर्ट में भी हड़कंप मच गया. इसके बाद तहसीलदार ने गलती मानी और अपनी सफाई दी. राजस्व न्यायालय के नायब तहसीलदार विक्रांत राठौर ने बताया कि ये एक मानवीय भूल है. ऑपरेटर ने नोटिस टाइप किया था, उसने मंदिर के पुजारी शिव मालाकार की जगह सीधे शिव मंदिर लिख दिया. इसके बाद बताया कि इस गलती को सुधार लिया गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि जितने भी लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनको कागज लाने होंगे. अगर कोई कागज नहीं लाता है तो इसे अवैध कब्जा माना जाएगा और उसके कब्जे को मौके से हटाया जाएगा. हालांकि अभी पूरे मामले की जांच चल रही है.