क्या ये सच हैः 100 साल पुरानी ये तस्वीरें, देखेंगे तो विश्वास नहीं होगा...

करीब सौ साल से पुरानी ये सभी फोटोग्राफ जो अपनी अलग कहानी बयां करती हैं. ये आपको सुनने और देखने में बेशक अविश्वसनीय लगें मगर ये उस दौर की सच्चाई है. आप भी देखिए इन फोटोज में छुपे अनकहे किस्सों को...

क्या ये सच हैः 100 साल पुरानी ये तस्वीरें, देखेंगे तो विश्वास नहीं होगा...
  • दि ग्रेट वॉल आफ चीन के बारे में तो आपने सुना ही होगा. ये विश्व की सबसे लंबी दीवार है. जिसे लगभग 200 ईसा पूर्व चीन के पहले सम्राट किन शी हुआंग ने बनाया था. इस दीवार को चीन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था. मगर आपने सोचा है कि ये दीवार कहां जाकर खत्म हो रही है. 3889 मील लंबी ये दीवार बोहाई खाड़ी के किनारे पर जाकर खत्म होती हैय इस जगह को शानहाई दर्रा या ओल्ड ड्रैगन्स हेड भी कहा जाता है. आप भी देखिए चीन की दीवार का आखिरी छोर...

  • निकोल टेस्ला एक ऐसा व्यक्ति जिसने अपने जीवनकाल में 3304 पेटेंट कराए थे. एलोन मस्क कार का ब्रांड नेम इसी व्यक्ति से जुड़ा है. टेस्ला का जन्म 15 जुलाई 1856 में हुआ और उस समय उन्होंने इलेक्ट्रसिटी टेक्नीक में कई बेहतर आविष्कार किए. अपने जीवन काल में बहुत सारे पेटेंट कराने वाले टेस्ला ने बेतार संचार और रेडियो की नींव डाली. ये तस्वीर टेस्ला की प्रयोगशाला की है जहां बैठकर वो अक्सर गहन चिंतन करके कुछ नया खोजते ही रहते थे. यही वो फ्यूचरिस्टिक लैबोरेट्री है जिसमें बैठकर टेस्ला ने हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर का आविष्कार किया और साथ ही एक्स रे के आविष्कार में कुछ नवीनतम प्रयोग भी किए...

  • फस्ट वर्ल्ड वार की शुरुआत जुलाई 1914 में हुए थी. हम में से बहुत लोगों को सिर्फ उस दौरान के कुछ ही अनुभवों को सोच सकते हैं. इस ऐतिहासिक लड़ाई में बुल्गारिया की सोच उस समय क्या थी ये कहना मुश्किल है. बुल्गारिया बाल्कन युद्ध के परिणामों के प्रभाव से अभी भी जूझ रहा है इसी वजह के चलते उसने न्यूट्रल रहना सही समझा लेकिन उसके मित्र राष्ट्र इस युद्ध में गहराई तक जुड़े थे तो उसको भी एक साल के अंदर इस युद्ध में शामिल होना पड़ा. स्क्रीन पर दिखाई गई फोटो में ये एक बल्गेरियन सैनिक है जो लड़ाई से पहले बजने वाले बिगुल के साथ स्वर मिला रहा है. ये सैनिक मशीनगन और ग्रेनेट से लड़ने वाला था इन नए आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल से हुई हानि ने प्लास्टिक सर्जरी को जन्म दिया. और ये पल कैमरे में कैद हो गए...

  • दिखाई गई ये फोटो 800 ईसा पूर्व यानि 2800 साल पहले की है. इनको हसान लवर्स का नाम दिया गया है. ये दोनों मेल कंकाल ईरान के हैं और इन दोनों में किसी बीमारी होने के कोई लक्षण नहीं मिले हैं. इन दोनों की उम्र 20 और 30 साल के आसपास आंकी गई है. ये पुरात्तव के क्षेत्र के विशेषज्ञों के लिए एक अद्भुद खोज रही. ऐसा माना जा रहा है कि ये पेयर उस समय की निशानी है जब ईरान में किसी बाहरी ताकत ने हमला किया और देश को तबाह करने की कोशिश की थी. फोटो से पता चलता है कि ये दोनों जिंदगी के आखिरी पलों में एक दूसरे को बाहों में लेकर किस करते हुए ही मर गए. इन दोनों के कंकाल को 1972 में खोजा गया.

  • ये नजारा परमाणु बम के ये पानी के नीचे का विस्फोट अद्भुद दिखता है. यूएस गर्वरमेंट ये देखना चाहती थी कि अगर न्यूक्लियर वार हो जाती है तो पंडुब्बीयों का क्या होगा. बेकर टेस्ट पहला अंडर वाटर परमाणु विस्फोट का था. विस्फोट होने के बाद ये किसी बादलों से बने मशरुम जैसा दिखता था. इस एक्प्लोजन में रेडियो एक्टिव स्प्रे और धुंध की 500 फीट ऊंची दीवार बन गई थी जो कि वातावरण के लिए बहुत खराब थी. उस समय जारी अधिकारिक मिलिट्री रिपोर्ट के मुताबिक जहाजों पर मौजूद ज्यादातर चूहे और सूअर या तो ब्लास्ट या फिर रेडिएशन से मर गए. इस टेस्ट में 57 युद्ध पोतों का इस्तेमाल किया गया था जिसमें से 8 युद्धपोत विस्फोट के डायरेक्ट कांटेक्ट में आने से डूब गए वहीं बाकी बचे युद्ध पोतों को भी डूबो दिया गया क्योंकि ये सभी इतने ज्यादा गर्म हो गए थे कि इनको हैंडिल करपाना संभव नहीं था.

  • फोटो में दिख रहा ये विशालकाय पेड़ रेड वुड का है. ये बहुत पुराना फोटो है जिसमें ये शख्स एक विशालकाय रेड वुड पेड़ के पास खड़ा है जिसे काटा जा रहा है. हालांकि आज के समय में इस पेड़ को काटना गैर कानूनी है. कैलिफोर्निया में पाए जाने वाले इन विशालकाय पेड़ों को दानवीय पेड़ कहना भी गलत नहीं होगा क्योंकि ये लगभग 240 फीट ऊंचे और 15 फुट चौड़े हो सकते हैं. इन पेड़ों को देखना किसी अजूबे से कम नहीं है और कैलिफोर्निया में पाए जाने वाले इन पेड़ों को देखने के लिए पर्यटकों का तांतां लगा रहता है. पुराने समय में लोगों को मकान बनाने और आग जलाने के लिए लकड़ी की जरुरत होती थी,ऐसे में ये विशालकाय पेड़ उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं थे. लेकिन आज की बात करें तो अब इन पेड़ों की उपलब्धता केवल 5 प्रतिशत ही रह गई है. 1850 से लेकर अब तक करीब 95 परसेंट पेड़ों को काटा जा चुका है.

  • ये है पहला अमेरिकन रोबोट, जिसका नाम स्टीम मैन है. इसे 1860 में बनाया गया था. ये एक तरह का पहला स्टीम मेकर इंजन था. इसका आविष्कार जैडोक डेडेरिक और इजाक ग्रास ने किया था. 1868 में इन्होंने इस रोबोट का पेटेंट करा लिया था. इस रोबोट में एक स्टीम कैरेज(हाथगाड़ी) के साथ मैटल से बने मैन फिगर को जोड़ा था. जब इस नए आविष्कार की प्रदर्शनी लगाई गई तो इसमें बोस्टन, शिकागो, न्यू औरलिंस और सेंट लूईस जैसे शहरों भारी भीड़ इकट्ठा हुई. इस आविष्कार के बाद आगे आने वाले समय में चलने-फिरने वाली मशीनों का भी निर्माण हुआ. यहां तक कि एक नोबल द स्टीम मैन आफ द प्रेयरिज भी लिखा गया, जिसे एडवर्ड एस एलिस ने लिखा था.

  • ये फोटोग्राफ साल 1923 का है जिसमें बुलेटप्रूफ वैस्ट की टेस्टिंग की जा रही है. पुलिस और सैनिकों के लिए बुलेटप्रूफ वैस्ट एक अनूठा आविष्कार था. ये 1920 के समय का सबसे विचित्र आविष्कार माना जा रहा था. जिसका श्रेय प्रोटेक्टिव गारमेंट कारपोरेशन आफ न्यूयार्क को जाता है. इसकी टेस्टिंग डिस्ट्रीक आफ कोलंबिया में हुई जिसे आज वाशिंगटन डीसी के नाम से जाना जाता है. ये दो लोग जो टेस्ट कर रहे हैं उन्हें अपने प्रोडक्ट पर इतना विश्वास था कि उन्होंने खुद पर ही इस टेस्ट को अंजाम दिया. बाद में चलकर ये आविष्कार तमाम तरह की सेना और सिक्योरिटी फोर्सेज के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हुआ. इन वैस्टी की खासियत थी कि ये बहुत लाइटवेट थे जिसकी वजह से इनको पहन कर रखना मुश्किल नहीं था. कुछ समय बाद इन वैस्ट ने पूरी जैकेट की शक्ल ले ली थी, जिसका इस्तेमाल अब भी बहुत होता है.

  • इस बात पर विश्वास करना मुश्किल है कि टेस्टी शीरा(गुड़ बनने से पहले उसका पिघला हुआ रुप) कितना खतरनाक हो सकता है कि भयंकर बर्बादी फैला दे. जी हां साल 1919 की एक सर्द रात को बोस्टन शहर में एक टैंक से बंदरगाह पर एक जहाज से 2 मिलियन गैलेन शीरा बिखर गया जिससे कि 15 फीट ऊंची लहरें उठीं, जिसकी रफ्तार 35 माइल्स प्रति घंटा थी. इस शीरे ने अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को खत्म कर दिया. जिसमें करीब 21 लोग मारे गए और 150 लोग घायल हुए. इस शीरे के दबाव की वजह से ट्रेन पटरी से हट गई और रास्ते में आने वाले बिजली के खंभे भी धराशायी हो गए. इस खतरनाक रुप ले चुके शीरे ने कई बिल्डिंग भी खत्म कर दीं.

  • ये जनाब रवांडा के रहने वाले हैं. ये फोटोग्राफ करीब सौ साल पुराना है. उस समय रवांडा का ये पापुलर ट्रेडिशनल हेयर स्टाइल था, जिसे अमासुनजू कहा जाता था. उस समय रवांडा के लोग अपने सोशल स्टेटस को दिखाने के लिए अलग-अलग हेयर स्टाइल का यूज करते थे. जो किसी भी प्रकार के हेयर स्टाइल का यूज नहीं करता था उसे शक की निगाह से देखा जाता था. उस दौरान रवांडा के निवासी करीब 30 तरह के हेयरस्टाइल कराया करते थे. ये हेयरस्टाइल इतना स्टेटस सिंबल शो किया करते थे कि हेयर स्टाइल से ये तय होता था कि आप एक वॉरियर हो या वर्जिन. इनमें लेडीज में भी मैरिड और अनमैरिड के हेयरस्टाइल अलग हुआ करते थे. ये हेयर स्टाइल कम शब्दों में अपनी बात और पर्सनेल्टी को कहने का जरिया बना हुआ था.