कांप उठा चीन, भारत ने सीमा पर स्पाइक मिसाइलें तैनात की, जोरावर टैंक भी छुड़ाएगा ड्रैगन के छक्के

नई दिल्ली. भारत अब चीन की सीमा पर ऐसे हथियार और आयुध प्रणालियां तैनात करने जा रहा है कि चीन की हालत खराब हो गई है. पहले ही लद्दाख के पैगांग इलाके में जबरदस्त पिटाई खा चुकी चीनी सेना के छक्के स्पाइक मिसाइल के नाम से छूटे हुए हैं. भारत ने लद्दाख में ये घातक मिसाइल तैनात कर दी है. यह एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल है. बेहद खतरनाक और अचूक निशाने वाली ये मिसाइल पलक झपकते ही दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह कर देती है. इसी के साथ चीन की सेना भारत में बने जोरावर टैंक को लेकर भी खौफ में है. हल्के वजन लेकिन जबरदस्त मारक क्षमता वाला जोरावर भी जल्द ही लद्दाख और चीन की सीमा वाले अन्य इलाकों में आग बरसाने के लिए तैनात हो जाएगा.

कांप उठा चीन, भारत ने सीमा पर स्पाइक मिसाइलें तैनात की, जोरावर टैंक भी छुड़ाएगा ड्रैगन के छक्के
ऊपर स्पाइक मिसाइल और नीचे जोरावर टैंक. फाइल फोटो

स्पाइक दागो, दुश्मन का काम तमाम

स्पाइक मिसाइल हमने इस्राइल से हासिल की है. ये मिसाइल इतनी खतरनाक है कि इसे निशाना बनाकर सिर्फ दागना पड़ता है, लक्ष्य का पीछा करते हुए बाकी काम खुद कर लेती है. इसका दूसरा फायदा ये है कि इसे कई तरह से दागा जाता है. भारत ने लद्दाख में स्पाइक मिसाइल तैनात की है. ये दुश्मन देश के टैंक और बख्तरबंद वाहनों को पल भर में तबाह करने की ताकत रखती है.

क्या है स्पाइक की ताकत

इसे कंधे पर रखकर दागा जा सकता है. इसे ट्राइपॉड स्टैंड पर लगाकर फायर किया जा सकता है. यह टैंक और हेलीकॉप्टर पर भी फिट की जा सकती है. एयर-फायरिंग स्पाइक ऑटोमेटिक रूप से दुश्मन के जमीनी ठिकानों, उनके टैंक रेजिमेंट को निशाना बनाने में सक्षम है. स्पाइक की रेंज लगभग 32 किमी है. इसस पर इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर लगा है. जो अपने निशाने को पहचानकर उसके पीछे तब तक पड़ा रहता है, जब तक कि उसे नेस्तनाबूद न कर दे.

क्या है जोरावर टैंक

जोरावर टैंक पूरी तरह से भारत में निर्मित है. इसका वजन करीब 25 टन है. जो टी-72 के मुकाबले बहुत कम है और यह इसे पहाड़ी इलाकों के लिए कारगर बनाता है. यह ड्रोन एकीकरण और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से लैस है. इसमें इतने अधिक फीचर हैं कि दुश्मनों के टैंकों और ठिकानों को क्षण भर में बर्बाद कर सकता है. इस टैंक के सुरक्षा बेड़े में शामिल होने से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ने जा रही है.

आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के अलावा इसमें मिसाइल सिस्टम, मुख्य तोपों समेत अन्य हथियार चलाने की प्रणाली विकसित की गई है. इस टैंक का वजन भले हल्का है, लेकिन इसकी मारक क्षमता इतनी भीषण है कि दुश्मनों के बड़े से बड़े टैंकों पर यह भारी पड़ेगा. यह पूरी तरह से बख्तरबंद टैंक है. इसे हजारों फीट की ऊंचाई और ऊबड़-खाबड़ व बीहड़ पहाड़ी क्षेत्रों पर आसानी से चढ़ाया जा सकता है।

गलवान में झड़प के बाद महसूस हुई जरूरत

वर्ष 2020 में चीनी सैनिकों के साथ भारत की झड़प के दौरान इस तरह के हल्के टैंकों की जरूरत महसूस की गई. ताकि दुर्गम क्षेत्रों में इसकी तैनाती करके दुश्मनों का काम तमाम किया जा सके. गलवान में हिंसक झड़प के दौरान सेना इतनी ऊंचाई पर टी-72 और टी-92 टैंक को भी तैनात कर चुकी थी. मगर इस दौरान एक ऐसे शक्तिशाली टैंक की जरूरत महसूस की गई, जो हर तरह से दुश्मन को पस्त कर सके. अब इसकी कमी जोरावर टैंक पूरी करेगा.