फतवा जारी होने के 33 साल बाद लेखक सलमान रुश्‍दी का गला रेतने की कोशिश, न्यूयार्क में वेंटीलेटर पर

विश्‍व प्रसिद्ध लेकर सलमान रुश्‍दी पर अमेरिका के न्‍यूयॉर्क में एक लेक्‍चर के दौरान काले कपड़े पहनकर पीछे से आए हमलावर ने ताबड़तोड़ चाकुओं से वार किए. खून से लथपथ सलमान रुश्‍दी को हेलीकॉप्‍टर से अस्‍पताल ले जाया गया. जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है. साथ ही माना जा रहा है कि अगर वे सलामत रहे तो अपने शरीर का एक अहम हिस्‍सा खो सकते हैं. इस हमले के बाद से नूपुर शर्मा को लेकर चिंता बढ़ गई है. क्‍योंकि उनको काफी समय से धमकियां मिल रही हैं. साथ ही कई लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है.

फतवा जारी होने के 33 साल बाद लेखक सलमान रुश्‍दी का गला रेतने की कोशिश, न्यूयार्क में वेंटीलेटर पर
photo sources: media

सलमान रुश्‍दी की हालत गंभीर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक लेक्चर के दौरान प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी (Salman Rushdie) पर चाकू से हमला कर उनका गला काटने की कोशिश की गई. जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है. वहीं हमले के संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है. जिससे पूछताछ चल रही है. वहीं माना जा रहा है कि इस हमले के पीछे कट्टरपंथियों का हाथ है. जिन्‍होंने पहले ही उनकी हत्‍या का फतवा जारी कर 28 करोड़ रुपए की घोषणा भी की थी. फिलहाल अमेरिकी पुलिस इस हमले की जांच पड़ताल में जुट गई है.

 

रूश्‍दी की हालत अच्‍छी नहीं है

मीडिया रिपोर्ट में रुश्दी के एजेंट एंड्रयू वायली के अनुसार, “मुंबई में जन्मे लेखक रुश्दी वेंटिलेटर पर हैं और वे बोल नहीं सकते हैं.” न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “खबर अच्छी नहीं है. सलमान की एक आंख खोने की संभावना है. उनकी बांह की नसें कट गई हैं और उनका लीवर खराब हो गया है.” न्यूयॉर्क राज्य पुलिस के मेजर यूजीन स्टैनिज़ेव्स्की के अनुसार, हमलावर की पहचान न्यूजर्सी स्थित फेयरव्यू के 24 वर्षीय हादी मतार के रूप में की गई है. हालांकि, वह किस देश से ताल्लुक रखता है, इसका अभी पता नहीं चला है.

 

लोगों ने सोचा चांटा मारा, खून से लथपथ‍ गिर पड़े

अमेरिका में भारतीय समयानुसार, शुक्रवार 12 अगस्त 2022 को जब 75 वर्षीय लेखक सलमान रुश्‍दी चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में मंच पर बैठे थे. तभी काले कपड़े पहने मतार पीछे से आया और लोगों के बीच बैठे सलमान रुश्‍दी पर चाकू से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए. हमले के दौरान लोगों को लगा कि हमलावर ने उन्हें चांटा मारा है, लेकिन अचानक उनके चेहरे पर बहता खून देखकर लोगों को घटना की गंभीरता का अंदाजा हो गया. इसी दौरान ऑडियंश में बैठी एक डॉक्टर मंच के पास आई और रुश्दी की मदद की. जिसके बाद उन पर किए जानलेवा हमले को लोग भांप पाए.

 

खून से लथपथ देख चिल्‍लाने लगे लोग

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना को लेकर रीटा लैंडमैन नाम की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने कहा कि रुश्दी के दाहिने ओर गले के आसपास कई घाव थे और वे खून से लथपथ होकर नीचे गिरे हुए थे. उस महिला डॉक्टर ने कहा कि वे अभी जीवित लग रहे हैं. इसके बाद कुछ लोगो ने उनकी नब्ज देखी और चिल्लाने लगे के यह चल रही है. घटना के कुछ ही पल में पुलिस पहुंच गई और कुछ देर बाद उन्हें हेलिकॉप्‍टर से अस्‍पताल पहुंचाया गया, जहां उनके कई ऑपरेशन किए गए. पुलिस FBI और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर हमलावर के उद्देश्य को जानने की कोशिश कर रही है. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हमलावर अकेला था या और भी लोग उसके साथ थे.

 

अमेरिकी इस्‍लामी संस्‍था ने हमले पर कहा

सलमान रूश्‍दी पर किए गए हमले को लेकर अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम नागरिक अधिकार समूह ‘काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस’ के प्रवक्ता इब्राहिम हूपर ने विक्टिम कार्ड खेलते हुए कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि हमलावर की पहचान सामने आने से पहले ही लोग मुस्लिमों या इस्लाम को छुरा घोंपने के लिए दोषी ठहरा सकते हैं. उन्होंने कहा, “सभी अमेरिकियों की तरह अमेरिकी मुस्लिम भी समाज में किसी को भी निशाना बनाने वाली हिंसा की निंदा करते हैं.” 14 उपन्यासों के लेखक और 2007 में नाइट की उपाधि से सम्मानित रुश्दी पर हमले को लेकर दुनिया भर में रोष है.

 

पहले से ही कट्टरपंथियों के निशाने पर थे रुश्दी

जानकारी के अनुसार मुंबई के एक सफल मुस्लिम व्यवसायी के घर जन्मे सलमान रुश्दी ने एक किताब लिखकर दुनिया में हड़कंप मचा दिया था. साल 1988 में लिखी गई उनकी पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ (The Satanic Verses) को लेकर ईरानी क्रांति के नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने उनकी हत्या के लिए फतवा जारी करते हुए लगभग 28 करोड़ रुपए घोषणा की थी. इस्लामवादियों का कहना था कि इस पुस्तक में इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया गया है. इसके बाद उन्हें दुनिया भर में कई जगहों से हत्या की धमकी मिली. उनकी किताब को भी कई देशों ने प्रतिबंधित कर दिया. इनमें से एक देश भारत भी है.

 

नूपुर शर्मा के लिए भी दिख रहा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार अपनी पुस्‍तक के बाद मिली धमकियों के खतरे के देखते हुए अल्लाह में विश्वास नहीं करने वाले रुश्दी भूमिगत हो गए थे. भारत से वे ब्रिटेन चले गए. रुश्दी एक बार फिर सार्वजनिक जीवन में साल 1990 के अंत में आए, जब ईरान ने घोषणा की कि वह रुश्दी की हत्या का समर्थन नहीं करता. हालांकि, उन पर खतरा बरकरार रहा और विवाद के 34 साल बाद उन पर जानलेवा हमला किया गया. इस हमले को देखते हुए भाजपा की पूर्व प्रवक्‍ता नूपुर शर्मा की जान को खतरा दिखने लगा है. जिनको पहले ही कट्टरपंथियों ने जान से मारने की धमकी दी है. साथ उनकी हत्‍या करने की मंशा रखने वाले दो आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार भी किया है. जिनमें एक पाकिस्‍तान से भारत में एंट्री करके आया था.