दिल्ली देश की राजधानी है या मुसलिम घुसपैठियों की सराय, पुलिस के अलावा सबको पता

न कोई ग्राउंड पुलिसिंग न ही कोई इंटेलीजेंस. ये हाल तब, जबकि सीएए-एनआरसी को लेकर दिल्ली पहले से उबल रही थी. बस सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाने के अलावा कोई प्रीवेंटिव या प्रोएक्टिव पुलिसिंग नजर नहीं आ रही है.

दिल्ली देश की राजधानी है या मुसलिम घुसपैठियों की सराय, पुलिस के अलावा सबको पता
जहांगीरपुरी में हिंसा के बाद का नजारा. सौजन्य-सोशल मीडिया

दिल्ली दंगे और जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती पर हुई इस्लामिक हिंसा से सवाल उठने लगा है कि ये देश की राजधानी है या अवैध मुसलिम घुसपैठियों की सराय. दिल्ली में बैठे केंद्रीय गृह मंत्रालय और उसके अधीन काम करने वाली दिल्ली पुलिस के अलावा सबको पता है कि ये इलाका अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की जन्नत है. ड्रग्स, चोरी के सामान की बिक्री, देह व्यापार, अवैध हथियार. कौन सा गैर-कानूनी धंधा है जो यहां नहीं होता.

बार-बार एक्सपोज दिल्ली पुलिस

देश की सबसे प्रोफेशनल फोर्स मानी जाने वाली दिल्ली पुलिस बार-बार एक्सपोज हुई है. दिल्ली पुलिस दिल्ली में हुए दंगे के समय एक्सपोज हुई. दंगे के लिए मुसलिम मोहल्लों में हर तरह की तैयारी थी. छतों पर पत्थर इकट्ठा किए गए. पेट्रोल बम बनाए गए. तेजाब की बोतलें तैयार की गईं. गुलेल बनाई गईं. बच्चों को पता था कि स्कूल नहीं जाना. मुसलिम व्यापारियों को पता था कि दुकान नहीं खोलनी. लेकिन बस दिल्ली पुलिस को कुछ पता नहीं था. न कोई ग्राउंड पुलिसिंग न ही कोई इंटेलीजेंस. ये हाल तब, जबकि सीएए-एनआरसी को लेकर दिल्ली पहले से उबल रही थी. बस सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाने के अलावा कोई प्रीवेंटिव या प्रोएक्टिव पुलिसिंग नजर नहीं आई. जब दंगा चल रहा था, तब भी पुलिस लाचार ही थी. इसलिए कि न तो दंगा रोकने की कोई रिहर्सल, न ही मजबूत इच्छाशक्ति.

दिल्ली दंगे से लेकर लाल किला हिंसा तक

दिल्ली पुलिस फिर 26 जनवरी 2021 को एक्सपोज हुई. दिल्ली की सीमाओं पर कथित किसान आंदोलन चल रहा था. पहले से ही राकेश टिकैत जैसे अविश्सनीय और भड़काऊ नेता ट्रेक्टर रैली निकालने की घोषणा कर चुके थे. टिकैत रोज चैनलों पर ताल ठोक रहे थे. क्या 26 जनवरी पर किसान दिल्ली की सड़क पर अपना ट्रेक्टर नहीं चला सकते. जो ट्रेक्टर लेकर पहुंचे थे उन्हें भी पता था कहां जाना है और उनके इंतजार में लालकिले पर बलवे के लिए तैयार बैठे लोगों को भी पता था कि क्या करना है. बस नहीं पता था, तो दिल्ली पुलिस को. दिल्ली पुलिस को बिल्कुल पता नहीं था कि क्या होने वाला है और क्या करना चाहिए. फिर वही पुलिसिंग के नाम पर बैरिकेडिंग. देश की पुलिस को कभी इतनी लाचार हालत में नहीं देखा, जैसा 26 जनवरी को उस दिन लालकिले पर देखा. देश ने देखा कि वर्दीधारी पुलिसकर्मी, जिन्हें लोगों की जान-माल की रक्षा करनी चाहिए, वे अपनी जान बचाने के लिए लाल किले के पास खाई में कूद रहे थे.

सुनियोजित था जहांगीर पुरी हमला

अब हनुमान जयंती के जुलूस पर जहांगीरपुरी में जिस तरीके से सुनियोजित हमला हुआ, उसमें फिर दिल्ली पुलिस उसी तरह लाचार नजर आई. हिंदू नववर्ष से देश में अलग-अलग जगह शोभा यात्राओं और हिंदू आयोजनों पर हमले का सिलसिला शुरू हो चुका था. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया जैसा कट्टरपंथी दहशतपसंद संगठन सुनियोजित तरीके से देश में डायरेक्ट एक्शन डे जैसी प्लानिंग कर रहा है. लेकिन दिल्ली में कोई तैयारी नहीं. जहांगीरपुरी में कट्टरपंथियों की भीड़ तलवार, पत्थर और हथियार लेकर इंतजार कर रही थी. इस भीड़ में स्थानीय कट्टरपंथियों के साथ बड़ी तादाद में बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या शामिल थे. यहां घरों में दड़बेनुमा कमरे बने हैं. जिनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या आबाद हैं. हर किस्म का अवैध काम ये लोग करते हैं. इस इलाके में एक लाख से ज्यादा घुसपैठिए होने का स्थानीय लोगों का अनुमान है. लेकिन न तो कोई पुलिस सत्यापन है और न ही घुसपैठियों की धरपकड़. दिल्ली पुलिस में कभी एक बहुत कारगर बांग्लादेशी सेल होता था. अकेले 2001 में दिल्ली पुलिस ने राजधानी में पचास हजार बांग्लादेशियों को पकड़ा था. लेकिन अब दिल्ली पुलिस के पास और बहुत काम हैं.

पहले भी हो चुकी हिंसा

ऐसा नहीं है कि जहांगीरपुरी में यह पहली बार हुआ है. इससे पहले भी यहां पर हिंसा हुई. वर्ष 2016 के सितंबर माह में भी हिंसा हुई थी. 18 सितंबर को उरी हमले के बलिदानियों की याद में स्थानीय लोगों ने कैंडलमार्च निकाला था. इस दौरान असामाजिक तत्वों ने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए थे और इसके बाद हिंसा में पांच लोग घायल हुए थे.

क्या ये कॉस्मेटिक पुलिसिंग है

सवाल तो दिल्ली दंगे के समय भी उठा था. सड़क के एक तरह पूर्वी दिल्ली है और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश. सड़क के एक ओर दंगा हो रहा था और दूसरी ओर किसी की पत्थर मारने की भी हिम्मत नहीं थी. दिल्ली दंगे में बाद पुलिस ने लंबी चौड़ी चार्जशीट तैयार की हैं, लेकिन क्या संवेदनशील इलाकों में हथियार, छतों पर पत्थर आदि की कोई चेकिंग उसके बाद हुई है. क्या कोई निरोधात्मक कार्रवाई प्रभावी ढंग से हुई. क्या जहांगीरपुरी की गलियों में जो 12 ब्लॉक बसे हैं, उसकी कोई चेकिंग हुई. नहीं. इसलिए कि दिल्ली में कॉस्मेटिक (दिखावटी) पुलिसिंग होती है.