स्वास्थ्य विभागः बड़े अफसरों को बचाया, छोटे अफसरों पर कार्रवाई की लीपा-पोती, नीति विरुद्ध तबादले भी निरस्त नहीं

लखनऊ: यूपी में तबादलों को लेकर हुए बवाल के बाद स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई के बाद लीपा-पोती शुरू हो गई है. सवालों के घेरे में एसीएस अमित मोहन प्रसाद और सचिव रविंदर को बचाने के लिए छोटे अफसरों पर कार्रवाई की गई है. दो अपर निदेशक और एक संयुक्त निदेशक को निलंबित किया गया है. कार्रवाई से ये तो साबित हो गया कि तबादलों में धांधली हुई है, लेकिन नीति विरुद्ध किए गए विकलांगों और रिटायरमेंट वाले कर्मचारियों के तबादले अभी तक निरस्त नहीं हुए है.

स्वास्थ्य विभागः बड़े अफसरों को बचाया, छोटे अफसरों पर कार्रवाई की लीपा-पोती, नीति विरुद्ध तबादले भी निरस्त नहीं
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सरकार की बड़ी कार्रवाई

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में हुए स्‍थानांतरण नीति के विरुद्ध किए गए थे. जिसके चलते स्‍थानांतरणा नीति के विरुद्ध हुए स्‍थानांतरणों को लेकर सरकार द्वारा कार्रवाई का बड़ा कदम उठाते हुए दो अपर निदेशकों तथा एक संयुक्‍त निदेशक को निलम्बित कर दिया गया है. माना जा रहा है कि इस मामले में अभी कुछ और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है. क्‍योंकि जिन अधिकारियों को निलम्बित किया गया है उन्‍हें पैरामेडिक‍ल कर्मचारियों के तबादलों का दोषी माना गया है, जबकि तबादले की अनियमितता चिकित्‍सकों से लेकर समूह ग तक के कर्मियों के तबादलों में बरती गयी है.

 

इनको किया गया निलंबित

रिपोर्ट के अनुसार निलंबित किये गये अधिकारियों में अपर निदेशक पैरामेडिकल डॉ. राकेश कुमार गुप्‍ता और संयुक्‍त निदेशक पैरामेडिकल डॉ. अरविन्‍द कुमार वर्मा शामिल हैं. इनको फार्मासिस्‍ट, ईसीजी टेक्‍नीशियन, प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ एवं एक्‍सरे टेक्‍नीशियन के तबादलों को लेकर निलंबित किया गया है. वहीं अपर निदेशक स्‍वास्‍थ्‍य प्रशासन डॉ अशोक कुमार पाण्‍डेय को प्रयोगशाला सहायकों के तबादलों में अनियमितता बरतने के आरोप में निलम्बित किया गया है. वहीं तीनों ही अधिकारियों को निलम्‍बन की इस अवधि में कार्यालय महानिदेशक से सम्‍बद्ध किया गया है.  

 

डिप्‍टी सीएम ने लिया था संज्ञान

बता दें कि शासन द्वारा बनाई गई स्‍थानांतरण नीति से परे जाकर बड़ी संख्‍या में चिकित्‍सकों, पैरामेडिकल कर्मियों और स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों के स्‍थानांतरण किये गए थे. जिसको लेकर तबादलों के आदेश आने के बाद से जिसको लेकर चिकित्‍सकों व अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों में जबरदस्‍त रोष उत्‍पन्‍न हो गया था. इस मामले में सबसे पहले उप मुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपर मुख्‍य सचिव अमित मोहन प्रसाद को पत्र लिखकर तबादलों पर जानकारी मांगी थी. लेकिन उनको बहाने बनाते हुए टाल दिया गया था. लेकिन मामले में असं‍तोष बढ़ता जा रहा था. तबादलों को लेकर कर्मचारियों में बड़ी नाराजगी देखी गई थी. वहीं इस मामले को लेकर मुख्‍यमंत्री ने संज्ञान लिया और सख्‍त हिदायत देते हुए मुख्‍य सचिव को जांच के आदेश दिये थे. इसके बाद से ही तबादला करने वाले अधिकारियों पर गाज गिर रही है.

बड़े अफसरों को बचाने पर सवाल

इस पूरे मामले में जिस तरीके से कार्रवाई के नाम पर खानापूरी की जा रही है, उसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद और सचिव रविदर के खिलाफ खासी नाराजगी है. तबादलों में दोनों वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे. इसके बावजूद अपर और संयुक्त निदेशक स्तर के छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर चर्चाएं हैं. कर्मचारियों का कहना है कि इन अफसरों की नीति विरुद्ध तबादलों में कोई खास भूमिका नहीं थी. याद दिलाना जरूरी है कि एसीएस प्रसाद के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय से भी जांच आई हुई है.