जिहाद के 32 ऑनलाइन कोर्स: गौस पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आया था, रियाज के साथ कट्टरपंथी संगठन का ऑनलाइन कोर्स कर रहा था

उदयपुर में कन्‍हैयालाल साहू की बेरहमी के साथ की गई हत्‍या में आरोपित दोनों हत्‍यारों के तार कराची से संचालित होने वाले इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लामी जुड़ रहे हैं. जिसका संबंध पाकिस्तान में बरेलवी पैन-इस्लामिक तहरीक-ए-लब्बैक चरमपंथी संगठन से है. पाकिस्‍तान के कराची से संचालित होने वाला दावत-ए-इस्‍लामी संगठन सुन्नी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने के लिए दुनियाभर में कई तरह के ऑनलाइन कोर्स संचालित करता है. वहीं अब इस पूरे मामले की तहकीकात एनआईए को सौंपी गई है. साथ ही इस मामले में पाकिस्‍तान और उसके आतंकी संगंठनों की भूमिका की जांच की जाएगी. वहीं सामने आया है कि दोनों हत्‍यारों को हत्‍या करने में प्रयोग हथियार अटारी से मिले थे.

जिहाद के 32 ऑनलाइन कोर्स:  गौस पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आया था, रियाज के साथ कट्टरपंथी संगठन का ऑनलाइन कोर्स कर रहा था
दोनों हत्‍यारे

पाकिस्‍तान से मिली शह

पूर्व बीजेपी नेता नुपुर शर्मा का समर्थन करने पर मंगलवार को 38 वर्षीय भीलवाड़ा के रहने वाले रियाज अटारी और 39 वर्षीय उदयपुर के मोहम्‍मद गौस ने दर्जी कन्हैया लाल साहू का धारदार हथियारों से सिर कलम कर हत्‍या कर दी थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्‍तान के अटारी में एक वेल्डर है जिसने कसाई के लिए पैगंबर की टिप्पणी विवाद से बहुत पहले ये चाकू तैयार किए थे. राजस्थान पुलिस ने दोनों हत्‍यारों रियाज और गौस मोहम्मद को राजसमंद से गिरफ्तार कर लिया, जब वे हत्‍या करने के बाद अजमेर शरीफ दरगाह पर एक और वीडियो शूट करने जा रहे थे. बताया गया कि दोनों इस्लामवादी कट्टरपंथियों ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप में पहले ही हत्या के प्‍लान की वीडियो को जारी कर दिया था. जो हत्‍या के बाद कुछ ही मिनटों में वायरल हो गया. बुधवार को राजस्थान पुलिस के महानिदेशक ने दावा किया कि मोहम्मद गौस पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आया था. वह वहां चार महीने रहा. 

कराची के दावत-ए-इस्‍लामी संगठन से संबंध

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दोनों हत्‍यारोपियों से पूछताछ में पता चला कि दोनों सुन्नी इस्लाम के सूफी-बरेलवी संप्रदाय हैं और इनके कराची में दावत-ए-इस्लामी संगठन के साथ घनिष्ठ संबंध हैं. आतंकवाद विरोधी अधिकारियों के अनुसार, यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या उनका भारत में अन्य चरमपंथी सुन्नी संगठनों के साथ कोई संबंध था, क्‍योंकि दोनों ही हत्‍यारोपी इस्‍लामी कट्टरपंथी हैं. फिलहाल  दोनों हत्‍यारों पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है और मामला अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपा गया है.

 

दावत-ए-इस्‍लामी की दुनियाभर में पहुंच

कराची स्थित दावत-ए-इस्लामी का उद्देश्य दुनिया भर में शरिया की वकालत करने के उद्देश्य से कुरान और सुन्नत की शिक्षाओं का प्रसार करना है. पाकिस्तान में इसकी बहुत बड़ी संख्या है और यह इस्लामिक गणराज्य में ईशनिंदा कानून का समर्थन करने के लिए जाना जाता है. इसके साथ ही उदयपुर में हुए इस हत्‍याकांड से देश की आंतरिक सुरक्षा में भीतरघात को लेकर खतरे की घंटी बज गई है, क्योंकि भारत में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ के साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में हो रहे अपराध से स्पष्ट है, जो भारत में राजनीतिक इस्लाम के उदय को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं है.

 

पीएफआई से भी संबंध टटोले जा रहे

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार माना जा रहा है कि जहां सरकार ने देश में बढ़ते कट्टरपंथ पर कड़ा रुख अख्तियार करने का फैसला किया है,  वहीं वह मुस्लिम नरमपंथियों के हाथों को मजबूत करने में भी विश्वास रखती है, जो कानून अपने हाथ में नहीं लेते हैं. गृह मंत्रालय भी उदयपुर हुए इस हत्‍याकांड पर कड़ी नजर रख रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी का चरमपंथी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) आंदोलन से कोई संबंध था या नहीं. केरल स्थित पीएफआई भारत में तेजी से बढ़ा है और अब सुन्नी पुनरुत्थानवादी आंदोलन के नाम पर पूरे देश में फैल गया है.

 

100 से ज्‍यादा देशों में सक्रिय दावत-ए-इस्‍लामी

उदयपुर हत्याकांड का पाक कनेक्शन सामने आने के बाद पता चला कि दोनों आरोपी पाकिस्तान के दावत-ए-इस्लामी संगठन से जुड़े हुए थे. यह संगठन 100 से ज्यादा देशों में सक्रिय है और इस्लाम के प्रचार-प्रसार के लिए कई तरह के ऑनलाइन कोर्स भी चला रहा है. इससे पहले भारत में इस इस्लामी संगठन पर धर्मांतरण के भी आरोप लग चुके हैं. ऐसी भी खबरें आई हैं कि इस संगठन द्वारा जगह-जगह पर दान पेटियां रखी जाती हैं. आरोप है इनके माध्यम से आने वाले धन को गलत गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता है.

दावत-ए-इस्लामी संगठन 4 दशकों से सक्रिय

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दावत-ए-इस्लामी खुद को गैर राजनीतिक इस्लामी संगठन करार देता है. जिसकी स्थापना 1981 में पाकिस्तान के कराची में हुई थी. मौलाना अबू बिलाल मुहम्मद इलियास ने इस इस्लामिक संगठन की स्थापना की थी. भारत में यह संगठन पिछले चार दशकों से सक्रिय है. शरिया कानून का प्रचार-प्रसार करना और उसकी शिक्षा को लागू करना संगठन का उद्देश्य है. इस समय यह संगठन करीब 100 से ज्यादा देशों में अपना नेटवर्क फैला चुका है. दावत-ए-इस्लामी की अपनी खुद की वेबसाइट है. वेबसाइट के माध्यम से यह इस्लामिक संगठन कट्टर मुसलमान बनने के लिए शरिया कानून के तहत इस्लामी शिक्षाओं का ऑनलाइन प्रचार-प्रसार कर रहा है.

 

जिहाद के 32 ऑनलाइन कोर्स

जानकारी के अनुसार करीब 32 तरह के इस्लामी कोर्स दावत-ए-इस्‍लामी की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. महिलाओं व पुरुष दोनों के लिए अलग-अलग तरह के कोर्स हैं. इसके अलावा यह संगठन कुरान पढ़ने और मुसलमानों को हर तरीके से शरिया कानून के लिए तैयार करता है. दावत-ए-इस्माली संगठन पर कई बार धर्मांतरण के आरोप भी लगे हैं. यह संगठन अपनी वेबसइट पर एक न्यू मुस्लिम कोर्स भी संचालित करता है. यह कोर्स भी पूरी तरह से ऑनलाइन है. इसका उद्देश्य धर्मांतरण कर नए-नए मुसलमानों को इस्लामी शिक्षाओं से रूबरू कराना है. इस कोर्स के माध्यम से धर्मांतरण करने वालों को जिहादी बनने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है. 

 

ऑनलाइन कोर्स से जुड़े थे कन्‍हैयालाल के हत्‍यारे

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या करने वाले दोनों आरोपी मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद 'दावत-ए-इस्लामीनाम के संगठन से जुड़े हुए हैं. ये दोनों इस्लामी संस्था के ऑनलाइन कोर्स से भी जुड़े हुए थे. हत्या के बाद दोनों आरोपी अजमेर दरगाह जियारत के लिए जाने वाले थे. दरअसल, यह संगठन दुनिया भर में सुन्नी कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है. हत्या की जांच करने के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया. एसआईटी टीम उदयपुर पहुंच गई है. इस हत्याकांड की जांच एनआईए भी करेगी. एनआईए की टीम भी आज उदयपुर पहुंचेगी. दरअसल, इस हत्याकांड के पीछे अंतरराष्ट्रीय साजिश की बात भी सामने आ रही है. नुपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के बाद आतंकवादी संगठन अलकायदा भी धमकी दे चुका है.